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उच्च न्यायालय के आदेश से संविदा डॉक्टरों के चेहरे पर खिली मुस्कान

  • निजी अस्पतालों में दे सकेंगे सेवाएं

मुंबई (सं. भा.) उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए एक आदेश ने संविदा डॉक्टरों के चेहरे पर मुस्कान ला दिया है। दरअसल उच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के उस सर्कुलर पर रोक लगा दी, जिसमें संविदा डॉक्टरों को राज्य भर में निजी सेवाएं प्रदान करने से रोक दिया गया था। कोर्ट के इस फैसले से संविदा डॉक्टरों को काम का समय पूरा करने के बाद निजी अस्पतालों में सेवाएं देने का रास्ता साफ हो गया है। गौरतलब है कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य पहल और आयुष के तहत सेवारत 44 डॉक्टरों ने स्वास्थ्य मिशन के निदेशक द्वारा 12 अप्रैल, 2021 को जारी परिपत्र के खिलाफ उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। सर्कुलर के मुताबिक, संविदा डॉक्टरों को निजी अस्पतालों में सेवाएं देने पर रोक लगा दी गई। है। सर्कुलर में यह भी कहा गया कि ऐसी गारंटी नहीं देने वाले डॉक्टरों का अनुबंध नहीं बढ़ाया जाएगा। याचिकाकर्ता जो वर्ष 2008 से राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत और उसके बाद अनुबंध के आधार पर काम कर रहे हैं। उन्हें 25,000 रुपये से 30,000 रुपये का मासिक वेतन मिल रहा है..

पीठ ने सुनी याचिका- कर्ताओं की दलीलें

इस राशि को देखते हुए उनके निर्धारित कार्य समय सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे के बाद उन्हें निजी सेवाएं प्रदान करने पर प्रतिबंध अनुचित है। धीरज सिंह ठाकुर एवं न्यायमूर्ति संदीप मानें की पीठ ने सर्कुलर पर रोक लगा दी है। डॉक्टर के साथ हुए अनुबंध यानी कॉन्ट्रेक्ट के अनुसार उनकी सेवा को प्रत्येक वर्ष विस्तार दिया जाता है। याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने बिना किसी शर्त के समझौते पर हस्ताक्षर किए है इसी तरह का प्रतिबंध सरकारी अस्पतालों में स्थायी डॉक्टरों पर भी लगाया गया था। याचिकाकर्ताओं ने अदालत का ध्यान इस ओर भी आकर्षित किया कि उच्च न्यायालय ने 8 जुलाई, 2022 को इस पर अंतरिम रोक लगा दी थी।

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