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सामरिक क्षमता बढ़ाने पर ध्यान

पिछले कुछ वर्षों से भारत अपनी सामरिक क्षमता बढ़ाने की ओर विशेष ध्यान दे रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण है वास्तविक नियंत्रण सीमा (एलएसी) पर बढ़ती पड़ोसी देशों की गतिविधियां। जिसे लेकर भारत पिछले कई वर्षों से इसे सामान्य करने का प्रयास कर रहा है। सैन्य स्तर पर और कूटनीतिक स्तर पर आज भारत एक सशक्त देश के रूप में उभरा है। आज देश की सामरिक क्षमता अपनी पड़ोसी देशों से कहीं अधिक है। हमारा रक्षा बजट इसका प्रमाण है। पहलगाम मे निहत्थे मासूम लोगों पर आतंकी हमले के बाद भारत कुछ ज्यादा ही सतर्कता बरत रहा है। उसने जिस तरह से ऑपरेशन सिंदूर के जरिए पाकिस्तान ही नहीं अपितु पूरे विश्व को यह बता दिया कि अब भारत अथवा भारत के लोगों पर हमला करने वालों को वह माफ नहीं करेगा। बल्कि उन्हें उन्हीं के घर मे घुसकर मारेगा। अब खबर आ रही है कि असम में एनएच-127 पर बनाई गई इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी  31 जुलाई तक पूरी तरह बनकर तैयार हो जाएगी। इसका 99 फीसदी काम पूरा हो चुका है। फोर-लेन हाइवे पर इस तरह की सुविधा पूर्वोत्तर में भारत की सामरिक ताकत में कई गुना इजाफा कर सकता है। वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पास होने से चीन हमेशा से यहां भारत के लिए बड़ा खतरा बना हुआ है। लेकिन, असम के डिब्रूगढ़ जिले के मोरन में एक नव-निर्मित नेशनल हाइवे पर बनाई गई इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी भारतीय वायुसेना और यहां तक थल सेना की ताकत में भी बढ़ोतरी करेगा। असम में बना एनएच-127 नगांव के पास एनएच-27 से शुरू होकर समागुरी को जोड़ते हुए आखिर में जाखलाबंधा तक एनएच-715 के नजदीक तक जाता है। इस फोर-लेन हाइवे से जहां असम के लोगों के लिए आवाजाही के अंदाज में बहुत बड़ा बदलाव होने जा रहा है, वहीं सामरिक नजरिए से यह भारतीय सशस्त्र सेनाओं के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इसका जायजा लिया है और उनकी ओर से जो जानकारी दी गई है, उससे पता चलता है कि आने वाले दिनों में यह क्षेत्र रणनीतिक तौर पर कितना अहम साबित होने वाला है। अक्तूबर से चालू हो जाएगी इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी -सरमा को नेशनल हाइवे और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एनएचआईडीसीएल) के साथ-साथ भारतीय वायुसेना (आईएएफ) के अधिकारियों ने जो जानकारी दी है, उसके अनुसार प्रोजेक्ट का 99% काम पूरा हो चुका है और 31 जुलाई तक यह पूरी तरह से तैयार हो जाएगा। 4.2 किलोमीटर लंबा यह हाइवे अक्टूबर से पूरी तरह से ऑपरेशनल हो जाएगा। इस हाइवे को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि यहां नागरिकों की जरूरतों के साथ-साथ सैन्य आवश्यकताओं के लिए भी इमरजेंसी लैंडिंग सुविधा उपलब्ध करवाई जा सके। हाइवे पर उतरेंगे फाइटर जेट राफेल-तेजस और सुखोई-30 भी। असम के मोरन में जो इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी बनाई गई है, उसे अत्याधुनिक फाइटर जेट को उतरने और उड़ान भरने के हिसाब से डिजाइन किया गया है। यहां जरूरत पड़ने पर राफेल, तेजस और सुखोई-30 जैसे लड़ाकू विमानों के साथ-साथ सशस्त्र सेना के सी – 130 हरक्यूलिस और एंटोनोव एएन-32 जैसे विशाल विमान भी उतर सकेंगे। आपातकाल में हाइवे पर वाहनों की आवाजाही रोककर, इसका तत्काल एयरस्ट्रीप के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा, जो कि घरेलू जरूरतों के लिए भी हो सकता है।

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