महावितरण को निजी कंपनियों से कड़ी चुनौती
मुंबई (स भा): महाराष्ट्र में बिजली वितरण के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है, क्योंकि मुंबई से सटे ठाणे और नवी मुंबई जैसे प्रमुख शहरी क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति के लिए निजी कंपनियों ने लाइसेंस की मांग की है। टोरेंट पावर ने अब महाराष्ट्र विद्युत नियामक आयोग (एमईआरसी) में एमएमआर क्षेत्र में बिजली वितरण लाइसेंस के लिए आवेदन किया है, जबकि अदाणी इलेक्ट्रिसिटी पहले ही इसी क्षेत्र में लाइसेंस के लिए आवेदन कर चुकी है। इन आवेदनों पर 22 जुलाई को ई-सुनवाई आयोजित की जाएगी, जिससे महावितरण को भविष्य में एक बड़ा झटका लगने की आशंका है।
वर्तमान में, मुंबई को छोड़कर पूरे महाराष्ट्र में महावितरण को बिजली वितरण का लाइसेंस मिला हुआ है और यह लगभग साढ़े तीन करोड़ उपभोक्ताओं को बिजली की आपूर्ति करता है। हालांकि, विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 14 और 15, साथ ही महाराष्ट्र विद्युत नियामक आयोग के नियम 2006 और विद्युत वितरण लाइसेंस नियम 2005 के अनुसार, अदाणी इलेक्ट्रिसिटी और टाटा पावर ने पहले ही महावितरण के कार्यक्षेत्र में समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस के लिए याचिकाएं दायर की हैं।
महावितरण की बढ़ेंगी मुश्किलें
महावितरण राज्य के सभी क्षेत्रों में घरेलू, औद्योगिक, वाणिज्यिक और कृषि पंपधारक उपभोक्ताओं को बिजली की आपूर्ति करता है। हालांकि, ग्रामीण क्षेत्रों में महावितरण को भारी बिजली हानि का सामना करना पड़ता है और कृषि उपभोक्ता समय पर बिल का भुगतान नहीं करते। ऐसी स्थिति में, ठाणे, नवी मुंबई, पुणे, नासिक जैसे शहरी और उच्च राजस्व वाले क्षेत्रों पर महावितरण का आर्थिक संतुलन टिका हुआ है। यदि इन क्षेत्रों में निजी कंपनियों को समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस दिया जाता है, तो महावितरण को आर्थिक रूप से गंभीर संकट का सामना करना पड़ सकता है, जिससे उसकी वित्तीय स्थिरता पर सीधा असर पड़ेगा।


