- मानव तस्करी मामले के वादी अमित शुक्ला ने दाख़िल की है याचिका*
- ज़मानत ख़ारिज करने, अकूत संपत्ति की जांच, परिवार की सुरक्षा समेत सात बिंदुओं पर लगाई है फरियाद*
- 20 जुलाई को डायरी नं. 28660/2023 में हुआ था सूची बद्ध, 07 अगस्त को हुआ था लिस्ट*
- 27 साल बाद किसी क्रिमिनल वाद में सर्वोच्च न्यायालय गया है कोई वादी…!*
फतेहपुर (प्रमोद श्रीवास्तव) । हाईप्रोफाइल ठग एवं गैंगस्टर शैलेन्द्र सिंह उर्फ़ राजू यादव की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। मानव तस्करी से जुड़े उसके एक चर्चित मामले में 08 सितम्बर को उच्चतम न्यायालय में सुनवाई की तिथि मुकर्रर हुई है। मानव तस्करी समेत विभिन्न धाराओं वाले मुकदमें में राजू को उच्च न्यायालय से मिली ज़मानत और उसकी अकूत संपत्ति की जॉच आदि से सम्बन्धित याचिका सम्बन्धित मुकदमें के वादी शहर के चित्रांश नगर निवासी अमित शुक्ला ने डाली है। यह याचिका सर्वोच्च न्यायालय में (डायरी नं. 28660/2023) विगत 20 जुलाई को सूची बद्ध हुईं, 07 अगस्त को लिस्ट हुआ जिसमें दौरान जिरह 08 सितम्बर तारीख मुकर्रर हुई है।*
*आरोप है कि पूर्व में शैलेंद्र सिंह ने अपने मर्चेंट नेवी इंजीनियर भाई के साथ मिलकर एक गैंग बनाया और तमाम बेरोजगारों को विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर करोड़ों रुपए की ठगी की। पीड़ित अमित शुक्ला द्वारा सर्वोच्च न्यायालय में डाली गई अर्जी में बताया गया है कि शैलेंद्र सिंह आदि ने उसके पिता से लाखों रूपए ऐठ कर उसे विदेश तो भेजवा दिया किन्तु उसको दिए गए वीजा में तगड़ा खेल होने से महीनो उसका जीवन खतरे में पड़ा रहा, बमुश्किल बच कर भारत लौट सका। अमित शुक्ला ने उपरोक्त गैंग पर दर्जनों बेरोजगारों को ठगने और इसी पैसे से अकूत सम्पत्ति जुटाने का भी आरोप लगाया है।*
*वादी द्वारा उच्चतम न्यायालय में डाली गई याचिका में शैलेन्द्र सिंह को उच्च न्यायालय द्वारा दी गई ज़मानत को रद्द करने। निश्चित समय सीमा में केश की सुनवाई पूरी कराने, उसकी एवं उसके गैंग के सदस्यों द्धारा जुटाई गई अकूत सम्पत्ति को आर्थिक अपराध की श्रेणी में रखते हुए किसी बड़ी एजेंसी से जांच कराने और स्वयं तथा अपने परिवार के सदस्यों को सुरक्षा व्यवस्था मुहैय्या करवाने समेत नौ बिंदुओं पर सर्वोच्च न्यायालय का ध्यान खींचते हुए न्याय की गुहार लगाई है।*
*बताते चलें कि इस अति चर्चित प्रकरण की मौजूदा समय में स्थानीय ज़िला कोर्ट में सुनवाई चल रही है। पुलिस ने चार्ज शीट भी दाख़िल कर दी है जिस पर उच्चतम न्यायालय एक निश्चित समय सीमा में सुनवाई पूर्ण करने का आदेश भी दे सकता है।*
*क्योंकि शैलेंद्र सिंह यादव आदि पर गैंगेस्टर ऐक्ट के तहत् की कार्यवाही भी हो चुकी है, ऐसे में यह संभावना बलवती है कि सुप्रीम कोर्ट वादी के अनुरोध पर आरोपी द्वारा पिछले कुछ वर्षों में अर्जित की गई अकूत संपत्ति की जांच किसी बड़ी एजेंसी से करवाने का आदेश भी दे सकता है!*
*गौरतलब है कि इस पूरे प्रकरण में लगभग तीन वर्षों के दरमियान सत्ता के कुछ उच्च पदस्थ नेताओं और पुलिस के उच्चाधिकारियों की भूमिका न सिर्फ़ संदिग्ध रहीं बल्कि वादी व उसके परिजनों को मानसिक रूप से घेराबंदी करते हुए सुलह का दबाव व आर्थिक प्रलोभन, न मानने पर अपराधिक फर्जी मुकदमा दर्ज़ कराया जाना बड़े खेल का हिस्सा रहा हैं..!*

*सर्वोच्च न्यायालय में मामला पहुंच जानें के बाद जहां आरोपी पक्ष में हड़कंप मच गया है, वहीं दर्जनों पीड़ितो को न्याय मिलने की उम्मीद जगी है। बड़ी बात यह है कि लगभग सत्ताईस साल बाद किसी अपराधिक मामले में किसी वादी ने न्याय की आस में सर्वोच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया है..!हाईप्रोफाइल ठग/गैंगस्टर शैलेन्द्र सिंह उर्फ़ राजू यादव के खिलाफ़ सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई पर जहां जिले के कई अलंबरदारो की नज़र टिकी है, वहीं इन संभावनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता है कि ऐसे मामलों से जुड़े एवं और भी पीड़ितो को बड़ी कार्यवाही के लिए आदेश होने की पूरी उम्मीद हैं…!*
*उधर मामला सर्वोच्च न्यायालय पहुंचने के बाद कोतवाली पुलिस ने किसी बड़ी फजीहत से बचने के उद्देश्य से आनन – फानन में पिछले दिनों मुख्य अभियुक्त शैलेन्द्र सिंह उर्फ़ राजू यादव की हिस्ट्री सीट (390बी) खोल दी है। बताते चलें कि इस समूचे प्रकरण में स्थानीय पुलिस की भूमिका शुरु से संदिग्ध रही है और वादी ने रिट में पुलिस की भूमिका पर कई सवाल भी उठाए हैं। ऐसा समझा जाता है कि मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचने की जानकारी होने के बाद कोतवाली पुलिस ने हिस्ट्री सीट खोलकर अपने को पाक साफ़ साबित करने का प्रयास किया है।*


