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Homeअन्यकविता-ग़ज़लगज़ल/जब जब आती है याद

गज़ल/जब जब आती है याद

जब जब आती है याद तेरी,

जानेमन तुझे भुलाने को।

सारी कोशिश नाकाम हुई,

दिल कहता है मर जानें को।।

हर ओर खुशी का आलम है,

मस्ती छाई है लोगों में।

मैं ग़म में डूबा रहता हूँ,

और तरस रहा मुस्काने को।।

मेरे संग में हीं खेल रचा,

इस तरह विधाता ने कैसा।

जीवन के अंत मुहाने पर,

मजबूर हूँ अश्क बहाने को।।

क्या सोचा था और क्या पाया,

अब सारे सपनें चूर हुये।

रसिया कुछ समझ नहीं आता,

क्या जग में बचा लुभाने को।।

गीतकार- रसियाकुमार

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