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हिंदी है,हम वतन है,हिंदोसतां हमारा।

इतिहास गवाह है कि किस प्रकार सत्ता की लडाई के लिये नायकों को धर्म के नाम पर प्रचारित किया जाता रहा है।
शिवाजी को हमेशा हिंदू नायक के नायक के तौर पर प्रचारित किया गया जबकि उनकी जलसेना का प्रमुख सिद्दी संबल नाम का मुसलमान था, और उसमें बडी संख्‍या में मुस्लिम सिददी थे। दिलचस्‍प बात यह है कि शिवाजी की सेना से भिडने वाली औरंगज़ेब की सेना नेतृत्‍व मिर्जा राजा जयसिंह के हाथ में था, जो कि हिंदु राजपूत था।
जब शिवाजी आगरा के किले में नजरबंद थे तब कैद से निकल भागने में जिन दो व्‍यक्तियों ने उनकी मदद की थी उनमें से एक मुलमान था जिसका नाम मदारी मेहतर था। उनके गुप्‍तचर मामलों के सचिव मौलाना हैदर अली थे और उनके तोपखाने की कमान इब्राहिम गर्दी के हाथ मे थी। उनके व्‍यक्तिगत अंगरक्षक का नाम रूस्‍त-ए-जामां था।शिवाजी महाराज के मुख्य 18 अंगरक्षको मे से 12 अंगरक्षक मुसलमान थे !
शिवाजी सभी धर्मों का सम्‍मान करते थे। उन्‍होंने हजरत बाबा याकूत थोर वाले को जीवन पर्यन्‍त पेंशन दिए जाने का आदेश दिया था। उन्‍होंने फादर अंब्रोज की उस समय मदद की जब गुजरात में स्थित उनके चर्च पर आक्रमण हुआ। अपनी राजधानी रायगढ़ में अपने महल के ठीक सामने शिवाजी ने एक मस्जिद का निर्माण करवाया था जिसमें उनके अमले के मुस्लिम सदस्‍य सहूलियत से नमाज अदा कर सकें। ठीक इसी तरह, उन्‍होंने महल के दूसरी और स्‍वयं की नियमित उपासना के लिए जगदीश्‍वर मंदिर बनवाया था।
अपने सैनिक अभियानों के दौरान शिवाजी का सैनिक कमांडरों को यह सपष्‍ट निर्देश रहता था कि मुसलमान महिलाओं और बच्‍चों के साथ कोई दुर्व्‍यवहार न किया जाए। मस्जिदों और दरगाहों को सुरक्षा दी जाए और यदि कुरआन की प्रति किसी सैनिक को मिल जाए तो उसे सम्‍मान के साथ किसी मुसलमान को सौंप दिया जाए।
एक विजित राज्‍य के मुस्लिम राजा की बहू को जब उनके सैनिक लूट के सामान के साथ ले आए तो शिवाजी ने उस महिला से माफी माँगी और अपने सैनिकों की सुरक्षा में उसे उसके महल तक वापस पहुँचाया शिवाजी को न तो मुसलमानों से घृणा थी और न ही इस्‍लाम से।उन्हे घृणा थी तो सिर्फ औरंगजेब से !
मै सभी मुस्लिम शासको को बडी इज्जत की नजर से देखता हू!उनका तहे दिल से सम्मान करता हू!इन्होंने ने भारत मे गंगा जमुनी तहजीब की नीव कायम की थी, लेकिन मुगल शासको मे मै व्यक्तिगत तौर पर #औरंगजेब और #बाबर को तहजीब नही देता, इनको इज्जत की नजरो से नही देखता!
औरंगजेब के शासन का उद्देश्य इस्लाम धर्म का प्रचार प्रसार करना था, औरंगजेब एक ज़ालिम, अत्याचारी, निर्दयी राजा था! भारत की गंगा जमुनी तहज़ीब को औरंगजेब ने ही सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया, जिसका दंश हम भारतीय आज तक झेल रहे है!औरंगजेब ने हिंदुस्तान की गंगा जमुनी संस्कृति को जो घाव दिए है,उसका दर्द आज भी रह रह कर हम भारतीयो को सालता है!व्यक्तिगत तौर पर मुझे सबसे ज्यादा चिढ औरंगजेब से होती है,जिसने इस्लाम धर्म के फैलाव के नाम पर भारत की एकता अखण्डता को सबसे ज्यादा चोट पहुंचाई !भारत की एकता को दांव पर लगा दिया!
गौरतलब है कि औरंगजेब ने शिवाजी महाराज को समझौते के नाम पर धोखे से मारने के लिए अफजल खान को भेजा था! जब शिवाजी ने अफजल खान को मारा तब अफजल खान के सचिव कृष्‍णाजी भास्‍कर कुलकर्णी ने शिवाजी पर तलवार से आक्रमण किया था।उस वक्त शिवाजी को बचाने वाला उनका अंगरक्षक रूस्तम ए जमाल एक मुसलमान ही था !अफजल खान को मारने की योजना बनाने वाला भी यही रूस्तम ए जमाल ही थी जो कि एक मुसलमान था !
इसी प्रकार महान हिंदू राष्ट्रवादी राणा प्रताप का राष्ट्र सिर्फ मेवाड था ना कि पूरा भारत। हल्दीघाटी के युद्ध में अकबर के सेनापति #मानसिंह जो एक हिंदू थे और राणा प्रताप के सेनापति #हकीमखां सूर जो एक मुसलमान थे,वे लड रहे थे।
अकबर के महल(राजधानी फतेहपुर सिकरी) में एक कृष्ण मंदिर था जिसमें आरती होते समय वह स्वंय उपस्थित रहते थे।कृष्ण जन्माष्टमी के दिन अकबर उपवास रखते थे!आगरा के लाल किले मे भी अकबर ने अपनी पत्नी जोधा बाई के लिए एक और मंदिर बनवाया था,वह मंदिर आज भी कायम है!
बाबर ने 1526-27 में राम मंदिर को गिरा रहा था और महज तीस चालीस बाद तुलसीदास मस्जिद में बैठकर रामचरित मानस लिख रहे थे!आप को जानकर आश्चर्य होगा कि हिंदु धर्म का एक मुख्य ग्रंथ #रामचरितमानस की रचना बनारस के गंगा घाट, बनारस की मस्जिद और अयोध्या की मस्जिद मे बैठ की गई है!रामचरित मानस हिंदु धर्म का एक प्रमुख ग्रंथ है, जिसकी अधिकतर रचना मस्जिद मे बैठ कर की गई है, रामचरित मानस की रचना के समय तुलसी दास जी इसकी चौपाईयो, छंदो मे सुधार के लिए सलाह अपने मित्र रहीम खान-ए-खाना जो लेते थे जो एक मुसलमान थे!भगवान् श्रीकृष्ण पर सबसे श्रेष्ठ दोहे, भजन, चौथाई, भक्ति गीत लिखने वालो मे सबसे ज्यादा आदणीय रचनाकारो मे रसखान और रहीम का भी नाम शुमार होता है,जो पांच समय के नमाज़ी मुसलमान थे !
आज हम जो देख रहे हैं वह इतिहास का सांप्रदायिकीकरण कर उसका इस्‍तेमाल समाज को बांटने के लिए किया जा रहा है!वर्तमान समय का तकाजा है कि हम संकीर्ण भावनाओं से ऊपर उठें ओर राष्‍ट्र निर्माण के काम में संलग्‍न हों।
हमे ही भारत की संस्कार ,सभ्यता, परंपरा,तहज़ीब,गंगा जमुनी संस्कृति को जिंदा रखना है! हिंदुस्तान है… तो हम है!

…..डॉ. धीरज फूलमती सिंह (वरिष्ठ स्तंभकार)

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