वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा ॥
प्रथम पूज्य, विघ्नहर्ता एवं मंगलकर्ता भगवान श्री गणेश का पावन आगमन हो चुका है। गणेशोत्सव का शुभारंभ हो गया है। यह महापर्व प्रत्येक जीवन में नई आशा, शुभारंभ और सकारात्मक ऊर्जा का संदेश लेकर आता है। दरअसल, भगवान श्री गणेश की कृपा से बुद्धि में विवेक, कर्म में सफलता, परिवार में सुख-समृद्धि आती है और जीवन के प्रत्येक मार्ग से समस्त विघ्न-बाधाएँ दूर हो जाती हैं।
इस गणेश चतुर्थी पर हमने भगवान श्री गणेश जी से देश हित में, लोक कल्याण के लिए कुछ प्रार्थनाएं की हैं। ये प्रार्थनाएं देश के विकास से संबंधित हैं। भारत को विकसित देश बनाने की दिशा से जुड़ा हुआ है। हमारा मानना है कि भारत के विकसित देश बनने का मतलब है देश हर तरह से सुखी है। हर तरह से संपन्न है। हर तरह से प्रगति के पथ पर अग्रसर है, और यह कार्य श्री गणेश जी के आशीर्वाद से भली भांति संपन्न हो सकता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तो अगले दो दशक में देश को विकसित देश बनाने का प्रण हर देशवासी से लेने का आह्वान किया है। इसके लिए केंद्र सरकार ने भारत को 5,000 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का संकल्प लिया है। हालांकि चुनौतियां बड़ी हैं। लेकिन श्री गणेश जी विश्वास है कि इसमें हमारी मदद करेंगे और भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में सहायक बनेंगे। इसके लिए जरूरी है ऊंची जीडीपी यानी सकल घरेलू उत्पाद हो, ज्यादा प्रति व्यक्ति आय हो, मानव विकास सूचकांक में अच्छी स्थिति हो, अर्थ व्यवस्था में इंडस्ट्री से ज्यादा सर्विस सेक्टर का योगदान हो, उन्नत इन्फ्रास्ट्रक्चर और शिक्षा एवं स्वास्थ्य की अच्छी व्यवस्था हो। यदि ये पैरामीटर हमने प्राप्त कर लिए तो हमारा देश विकसित राष्ट्र बनकर रहेगा।
हमारा देश लगातार विकास के पथ पर बढ़ रहा है। हम दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था हैं। ब्रिटेन से हम थोड़ा ही पीछे हैं। 2050 तक हम अमेरिका और चीन के बाद तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होंगे। हालांकि अधिक आबादी के चलते प्रतिव्यक्ति आय के मामले में ऊपर आना हमारे लिए बड़ी चुनौती बना रहेगा। लेकिन गणराया इस चुनौती को आसान करेंगे।
देश के विकास में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और स्वास्थ्य का अप्रतिम योगदान है। नागरिकों की शिक्षा और स्वास्थ्य (मानव पूंजी) में निवेश करने से देश की कार्यकुशलता और उत्पादकता बढ़ती है।
बुनियादी ढांचे का विकास बेहद जरूरी है क्योंकि सड़कें, रेलवे, बंदरगाह, बिजली और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसी सुविधाएं व्यापार को आसान बनाती हैं और आर्थिक गतिविधियों को गति देती हैं।
आर्थिक सुधार और उद्योग के क्षेत्र में भी प्रगति होनी चाहिए क्योंकि नए उद्योगों, स्टार्टअप और व्यापार को बढ़ावा देने से रोजगार के अवसर पैदा होते हैं और देश की जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) मजबूत होती है।
भ्रष्टाचार मुक्त शासन भी अत्यावश्यक है। पारदर्शी नीतियां, कानून का शासन और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने से निवेशकों का भरोसा बढ़ता है और संसाधनों का सही उपयोग होता है।
विज्ञान और नवाचार की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। अनुसंधान और नई तकनीकों को अपनाने से देश वैश्विक स्तर पर आत्मनिर्भर और प्रतिस्पर्धी बनता है।
हे गणराया, ग्रामीण भारत की भी प्रगति होनी चाहिए। भारत की आत्मा गांवों में बसती है, यानी 70 फीसदी ग्रामीण आबादी वाले देश के समग्र विकास का जब भी संदर्भ लें, गांवों को प्राथमिकता मिलनी ही चाहिए। सीधे अर्थ में कहें तो आत्मनिर्भर और शहरी संभावनाओं से पूर्ण गांवों की उपस्थिति ही संपूर्ण विकास का द्योतक हो सकती है।
हे गणराया, गणेश चतुर्थी के इस पावन पर्व पर श्रद्धा, भक्ति और सद्भाव के साथ हम भारतीय विनम्र प्रार्थना करते हैं कि हमारे देश की बहुआयामी प्रगति हो। हमारा देश विकसित राष्ट्र बने।
तो, फिर आइए, हम गणपति बप्पा का स्वागत करें तथा सत्य, सेवा और सदाचार के मार्ग पर चलने का संकल्प लें।
विघ्नविनाशक श्री गणेश जी आप सभी के जीवन को सुख, शांति, समृद्धि और मंगलमय सफलताओं से परिपूर्ण करें।
गणपति बप्पा मोरया! मंगलमूर्ति मोरया!


