- मुंबई के डॉक्टरों की प्रतिक्रिया
मुंबई (सं. भा.)— आम बजट में हेल्थकेयर को लेकर कई घोषणाएं की गई हैं, जिनमें एमबीबीएस की 10,000 मेडिकल सीटें बढ़ाने की बात प्रमुखता से सामने आई है। हालांकि, चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि सीटें बढ़ाने से अधिक जरूरी है मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और प्रशिक्षण नहीं मिलेगा, तब तक केवल सीटों की संख्या बढ़ाने से योग्य डॉक्टर तैयार नहीं होंगे।
मेडिकल बजट पर उठे सवाल
एसीएस हेल्थ के डायरेक्टर डॉ. आशीष तिवारी का कहना है कि हेल्थकेयर बजट को इस साल पिछले वर्ष की तुलना में करीब 8,000 करोड़ रुपये बढ़ाया गया है, लेकिन यह ऊंट के मुंह में जीरा जैसा है। उनका कहना है कि हमारे देश का हेल्थकेयर बजट जीडीपी के अनुपात में मात्र 2 प्रतिशत से भी कम है, जबकि अन्य विकसित देशों में यह 10 से 17 प्रतिशत तक है। यह आंकड़ा निराशाजनक है और इसे प्राथमिकता दी जानी चाहिए थी।
कैंसर मरीजों के लिए राहत
मुंबई के लीलावती हॉस्पिटल के ट्रस्टी डॉ. राजेश मेहता ने बजट में कैंसर मरीजों के लिए किए गए प्रावधानों की सराहना की। उन्होंने कहा कि जिला अस्पतालों में 200 डे-केयर सेंटर्स खोलने का निर्णय कैंसर केयर मैनेजमेंट को बेहतर बनाएगा। इसके अलावा, 36 लाइफ-सेविंग दवाओं की कीमतों में कटौती करना एक अच्छा कदम है, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है। सरकार को सभी जरूरी दवाओं के लिए मूल्य नियंत्रण नीति लानी चाहिए ताकि महंगे इलाज से जूझ रहे मरीजों को राहत मिल सके।

मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर होगा मजबूत
डॉ. प्रशांत मिश्रा ने कहा कि अगले पांच वर्षों में 75,000 नई मेडिकल सीटों की बढ़ोतरी और वित्त वर्ष 2025-26 में 10,000 अतिरिक्त सीटें जोड़ने की योजना देश के मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह स्वास्थ्य क्षेत्र में बढ़ती मांग को पूरा करने में मदद करेगा और विशेष रूप से पिछड़े इलाकों में बेहतर चिकित्सा सेवाएं प्रदान करने में सहायक होगा।
हालांकि, डॉक्टरों का मानना है कि केवल सीटें बढ़ाने से समस्या हल नहीं होगी, जब तक कि मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार नहीं किया जाता। देश को केवल ज्यादा डॉक्टर नहीं, बल्कि कुशल और योग्य डॉक्टरों की जरूरत है, जो आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों और चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार हों।


