भारत स्टार्टअप और सॉफ्टवेयर से लेकर अन्तरिक्ष जैसे विभिन्न क्षेत्रों में सामर्थ्यवान देश के रूप में चमक रहा है। प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी ने भी युवाओं से आग्रह किया कि वे डिजिटल लेन-देन ही करें और नकद व्यवहार न करें तो देश में एक बड़ी आर्थिक क्रान्ति ला सकते हैं। यूक्रेन संकट के कारण जब अमेरिका और जापान सहित दुनिया की विभिन्न अर्थव्यवस्थाएँ मंदी का सामना कर रही हैं तब भारत तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था वाले देश के रूप में चिन्हित किया जा रहा है।
संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि चालू वित्त वर्ष में भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 6.4 प्रतिशत की वृद्धि होने का अनुमान है। वित्त वर्ष 2021-22 में भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआइ) में रिकॉर्ड बढ़ोत्तरी हुई। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के मुताबिक भारत ने वित्त वर्ष 2021-22 में 83.57 अरब डालर का रिकॉर्ड एफडीआइ प्राप्त किया। 2020-21 में यह आंकड़ा 81.87 अरब डॉलर था। प्रमुख निवेशक देशों के मामले में सिंगापुर 27 प्रतिशत के साथ शीर्ष पर मौजूद है। इसके बाद अमेरिका 18 प्रतिशत के साथ दूसरे, मारीशस 16 प्रतिशत के साथ तीसरे स्थान पर है। कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर, हार्डवेयर, आटोमोबाइल एवं सेवा उद्योग में सबसे अधिक एफडीआइ प्राप्त हुआ है। देश का विदेशी मुद्रा भण्डार भी 600 अरब डॉलर के मजबूत स्तर पर है।
भारत मैन्यूफैक्चरिंग के क्षेत्र में विदेशी निवेश के लिए भी उभरकर सामने आ रहा है। विश्व में भारत ने अपनी साख बनाई है। भारत के लिये कहा जा रहा है कि वह सस्ती लागत के विनिर्माण में चीन को पीछे छोड़ सकता है। भारत में विनिर्माण उद्योग, जितनी अधिक तरक्की करेंगे, अर्थव्यवस्था में उतने ही रोजगारों का सृजन होगा।
भारत के पास तकनीकों की कमी नहीं है। इसके अतिरिक्त श्रम कानूनों को सरल बनाया गया है, जिससे उद्योग सफलता के सोपानों पर हैं।
भारत को सामर्थयवान बनाने में देश के कृषि क्षेत्र की बहुत बड़ी भूमिका है। कृषि मंत्रालय द्वारा प्रस्तुत तीसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार फसल वर्ष 2021-22 में देश में कुल खाद्यान्न उत्पादन रिकॉर्ड 31.46 करोड़ टन होगा ,जो पिछले वर्ष की तुलना में 37.7 लाख टन अधिक है। यद्यपि इस वर्ष गेहूँ का उत्पादन 10.64 करोड़ टन होगा जोकि पिछले साल के मुकाबले 31 लाख टन कम है, लेकिन धान, मोटे अनाज, तिलहन का रिकॉर्ड उत्पादन होता दिखाई दे रहा है।
क्वाड के रूप में जिस नई ताकत का उदय हो रहा है वह भारत के उद्योग कारोबार के विकास में मील का पत्थर साबित हो सकता है। भारत के मैन्यूफैक्चरिंग हब बनने में इसका बड़ा योगदान सिद्ध होगा। भारत उद्योग कारोबार के विस्तार के लिये त्रिआयामी रणनीति पर आगे बढ़ रहा है उससे भी मैन्यूफैक्चरिंग हब की सम्भावनाओं को मजबूती मिलेगी।
भारत से दुनिया की उम्मीदें लगातार बढ़ रही हैं। इसके लिए ‘आत्मनिर्भर भारत अभियान’ और ‘मेक इन इण्डिया’ को सफल बनाना होगा। देश में खाद्यान्न उत्पादन और निर्यात को बढ़ाने के प्रयास करने होंगे। लेन-देन डिजिटल करने होंगे। तभी भारत वर्ष 2026-27 तक पाँच लाख डॉलर की अर्थव्यवस्था बन पायेगा। उम्मीद है भारत दुनिया के सपनों पर खरा उतरेगा।
—नन्दिनी रस्तोगी ‘नेहा’, मेरठ


