मन थका हो तो बहाल होना चाहिए,
गम की चादर पर बिंदास सोना चाहिए।
बंजर – सी हो गई है ईमान की जमीं,
किसी को खुद्दारी का बीज बोना चाहिए।
किसी को किसी के दुःख से मतलब नहीं,
तो, बिना अश्क़ के भी रो लेना चाहिए।
लाख तूफां आये किसे परवाह है,
हमें अंदर से मजबूत होना चाहिए।
बंगला – कार हमें भले न मयस्सर हो,
पर आदमी को दिलदार होना चाहिए।
हो सके तो प्यार की फसल उगाओ,
नफ़रत का बीज कभी न बोना चाहिए।
भले न बिछा सको फूल किसी की राह में,
किसी की राह में काँटा न बोना चाहिए।
गीतकार* रसियाकुमार


