मुंबई (सं. भा.) । औद्योगिक क्षेत्र में मान्यता प्राप्त देश की बड़ी कंपनी लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) में मजदूरों का आर्थिक शोषण कर खून चूसते हुए 25 हजार करोड़ का भ्रष्टाचार हुआ। औद्योगिक इस्तेमाल के लिए दी गई कंपनी की पवई स्थित जमीन का अवैध रूप से कमर्शियल और रेसिडेंसियल रूप में दुरुपयोग हो रहा है। 24 मंजिली 8 इमारतों का कार्य कलेक्टर स्टे के बावजूद हो रहा है। मजदूरों की सैलरी से एलएंडटी वेलफेयर फाउंडेशन के नाम से आर्थिक लूट की गई। उन मजदूरों को सेवानिवृत्त नहीं होने दिया गया और काम छोड़ने के लिए मजबूर किया गया, लेकिन इतना सब कुछ होने के बावजूद भाजपा सरकार कान में रूई डाले बैठी रही। इसके अलावा कांग्रेस, रांकापा भी इतने बड़े घोटाले पर चुप बैठी है।
वर्करों ने हाई कोर्ट में दायर की याचिका
एलएंडटी के पर्व सीईओ, एमडी एएम नाईक पर मजदूरों पर अत्याचार और अन्याय के भीषण आरोप लगे हैं। वर्ष 2000 तक इस कंपनी में 8000 तक वर्कर थे, लेकिन कंपनी की दुर्व्यवस्था के कारण अब केवल 800 लोग वहां काम कर रहे हैं। इससे पता चलता है कि यहां के वर्करों-मजदूरों को किस हद तक प्रताड़ित किया गया है। इन सब अत्याचारों से तंग आकर कंपनी में 33 साल तक काम कर चुके उदय दीक्षित के साथ अन्य वर्करों ने हाई कोर्ट में रिट पिटीशन दाखिल किया है।
कंपनी की जमीन का दुरुपयोग
एलएंडटी कंपनी ने जमीन का दुरुपयोग करते हुए उसे मुनाफे के लिए कर्मशियल और रेसिडेंसियल कर दिया। इससे उन्होंने करोड़ों रुपए का घोटाला किया। कंपनी को उद्योग के उद्देश्य से जमीन दी गई थी, लेकिन कंपनी वहां अवैध तरीके से कमर्शियल, रेसिडेंसियल इमारते बना रही है। उस जगह के उद्योग को गुजरात में शिफ्ट किया गया। इसके अलावा एलएंडटी टेंगल, पी पॅक, पेट्रोल पंप, ईवंक सहित कई कंपनियों को बेच दिया गया। जमीन बेचकर इन जमीन का रेसिडेंसियल और कर्मशियल उपयोग के लिए इस्तेमाल किया गया। इस तरह बड़े घोटाले को अंजाम दिया गया।
मनपा में शिवसेना की सत्ता, इसलिए हुआ घोटाला!
वर्करों ने आरोप लगाया है कि कंपनी का रिकॉगनाइज रजिस्टर यूनियन, भारतीय कामगार सेना शिवसेना का है और मुंबई महानगरपालिका में भी शिवसेना की सत्ता है, इसलिए ही कंपनी में जमकर भ्रष्टाचार हुआ है। वर्करों का आरोप है कि कंपनी में जो भ्रष्टाचार हुआ है, वह उद्योग क्षेत्र का सबसे बड़ा भ्रष्टाचार है। आम जनता के हितों से जुड़े इस मुद्दे पर शिवसेना की चुप्पी सारी कहानी साफ कह देती है।
लार्सन एंड टुब्रो का मुख्यालय मुंबई में है। कंपनी की स्थापना 1938 में मुंबई में दो डेनिश अभियंता, हैनिंग होल्च लार्सन एवं सोरेन क्रिस्टियन टुब्रो ने की थी। यह सच्चे अर्थों में राष्ट्रीय कंपनी कहलाए जाने की हकदार है, क्योंकि इसके 35 प्रतिशत शेयर एलआईसी के पास हैं और 45 प्रतिशत शेयर सरकार के पास है।
यह देश की ऐसी बड़ी कंपनी है, जिसका टाटा, बिड़ला या अंबानी की तरह कोई एक मालिक नहीं है। इसमें 25 साल तक सीईओ, एमडी रहे एएम नाईक पर आरोप है कि उन्होंने कंपनी को आगे बढ़ाने के बहाने कंपनी के साथ खेलते हुए बहुत कंपनियां दलाली लेते हुए बेची और बहुत बड़ा भ्रष्टाचार किया। एलएंडटी के पूर्व सीईओ, एमडी एएम नाईक से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो पाया।
वर्करों की सैलरी हड़पी
2003 से लकर 2008 तक वर्करों की सैलरी से बिना एग्रीमेंट किए कंपनी 30 हजार रुपए कंपनी ने 6 प्रतिशत से ले लिए और वर्करों को ठेंगा दिखा दिया। गौरतलब है कि वर्करों की 30 हजार रुपए तक की सैलरी कंपनी मैनेजमेंट ने एलएंडटी वेलफेयर फाउंडेशन प्रा.लि. कंपनी नाम से रजिस्टर करते हुए एलएंडटी इक्विटी शेयर्स देने की बात की। डायरेक्टर मैनेजमेंट ने ईसॉप इक्विटी शेयर्स लाखों से लिए, लेकिन वर्करों को कुछ नहीं दिया गया। कंपनी मैनेजमेंट की ओर से वर्करों से वादा किया गया था कि हम आपको इक्विटी शेयर देंगे, लेकिन यह वादा भी झूठा निकला। वर्कर की सैलरी लेकर उन्हें फिर काम नहीं दिया गया। कहा जा सकता है कि वर्करों को रिटायर होने नहीं दिया गया।
मैंने 33 साल तक कंपनी में काम किया, लेकिन मेरे साथ अन्याय हुआ। केंद्र की मोदी सरकार और महाराष्ट्र की फडणवीस सरकार इस मामले में चुप है और जांच करवाने से कतरा रही है। भुजबल, खडसे के नाम से भ्रष्टाचार की बातें होती हैं। चिक्की घोटाले की बातें होती हैं, लेकिन देश के पहले उद्योग में चौतरफा भ्रष्टाचार होता हो, तो भी एएम नाईक को पद्मविभूषण दिया जाता है, यह देश के लिए शर्मनाक है। एलएंडटी ट्रस्ट का एलटीआईटी टेक्निकल डिप्लोमा कॉलेज पवई में 35 साल था। गैर तारीख से टैक्स बचाने के लिए उसको एलएंडटी में लिया गया। बढ़ा-चढ़ा कर खर्चा बताते हुए टैक्स पर छूट ली गई। अब छूट नहीं मिलती, इसलिए एआईसीटीई के परमिशन के बिना महाराष्ट्र टेक्निकल बोर्ड के नियम तोड़ते हुए उसे गिरा दिया गया।
गलत तारीख से बंद करने के लिए एलएंडटी इंफोटेक महापे में एमआईडीसी के नियम का उल्लंघन करते हुए चलाया जा रहा है। कॉलेज के शिक्षक और विद्यार्थियों को मानसिक तकलीफ दी जा रही है। राज्यपाल, मुख्यमंत्री, उद्योग मंत्री, कामगार मंत्री और प्रशासन को तीन साल से शिकायतें हो रही हैं, लेकिन फिर भी भ्रष्टाचार जारी है। देश के साथ, शेयर होल्डर्स के साथ, मजदूरों के साथ धोखा हुआ है। भ्रष्टाचार हुआ है। आदर्श जैसी दस इमारतें खड़ी हो रही हैं, लेकिन मीडिया इस पर बातें करने को तैयार नहीं है।
– उदय दीक्षित, कल्याण, एलएंडटी मजदूर, शेयर होल्डर


