आज महिलाएं कामयाबी की बुलन्दियों को छू रही हैं । हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं । इन सब के बावजूद उन पर होने वाले अन्याय , बलात्कार प्रताड़ना और शोषण आदि में कोई कमी नहीं आई है । हमारे समाज में महिलाएं शिक्षित होने के बाद भी अपने कानूनी अधिकारों से अनभिञ हैं , सभी शिक्षित या अशिक्षित महिलाएं नहीं पर हॉ , भारतीय समाज का एक बड़ा वर्ग आज भी अपने कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक नहीं है। इसीलिए न केवल अशिक्षित बल्कि शिक्षित महिलाओं पर भी अत्याचार हो रहे हैं । मेरे हिसाब से महिलाओं के अधिकारों की जानकारी 9-10 कक्षा की पाठ्य पुस्तक में शामिल होना चाहिए , ताकि देश की हर शिक्षित लड़की को उसके अधिकार पता हों और उनके द्वारा घर की अन्य अशिक्षित महिलाओं तक भी उनके अधिकार के लिए बनाये गये कानूनों की पहुँच हो सके ।
पहला अधिकार संपत्ति पर है , कहते है लड़कियों का कोई घर नहीं होता , जबकि लड़की चाहे विवाहित हो या अविवाहित उसका अपने पिता की संपत्ति में बराबर का हिस्सा पाने का हक है । इसके अलावा विधवा बहू अपने ससुर से गुजारा भत्ता व संपत्ति में हिस्सा पाने की हकदार है । ” हिन्दु मैरिज एक्ट 1955 के सेक्शन 27 के तहत ” पति व पत्नि दोनों की जितनी भी संपत्ति है , उसके बंटवारे की मॉग भी पत्नी कर सकती है । इसके अलावा पत्नी का अपने ” स्त्री धन “पर भी पूरा अधिकार रहता है ।
अगर महिलाएं किसी वजह से पुलिस स्टेशन नहीं जा पा रही हैं । तो ई-मेल या रजिस्टर्ड डाक के जरिए डिप्टी कमिश्नर या कमिश्नर स्तर के अधिकारी को लिखित में शिकायत भेज सकती हैं इसके बाद ये अफसर संबंधित थानाधिकारी को मामले की सत्यता की जॉच करने और कारवाई के निर्देश देते हैं ।और वर्तमान में बहुत से राज्य महिला आयोग ने अपने व्हाट्सअप नंबर जारी किये हुए है , जिन्हें आसानी से सर्च कर आप लिखित में शिकायत बड़ी आसानी से भेज सकते हैं , और वहॉ से आपको राहत भी बहुत जल्द उपलब्ध करायी जायेगी ।
मासूम बच्चियों के साथ बढ़ते बलात्कार के मामलों को गंभीरता से लेते हुए , अब इस प्रकार के मामलों की सुनवाई महिला जज ही करेगी , का प्रावधान किया गया है । क्योंकि ऐसी सुनवाई में महिलाओं का एक तरह से अपमानित महसूस कराया जाता था , इसीलिए अब ऐसे मामलों में पीड़िता के बयान महिला पुलिस अधिकारी उसके परिवार की मौजूदगी में दर्ज करेगी ।
हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम 1956 के तहत प्रसव के बाद महिलाओं को तीन माह की वैतनिक मेटर्निटी लीव दी जाती है , इसके बाद भी वे चाहें तो तीन माह तक अवैतनिक मेटर्निटीलीव ले सकती हैं। इस अधिनियम के तहत विधवा अपने मृत पति की संपत्ति में अपने हिस्से की पूर्ण मालकिन होती है । पुन: विवाह कर लेने के बाद भी उसका ये अधिकार बना रहता है ।

तलाक की याचिका पर शादीशुदा स्त्री हिन्दू मैरिज एक्ट के सेक्शन 24 के तहत गुजाराभत्ता ले सकती है । तलाक लेने के निर्णय के बाद सेक्शन 25 के तहत परमानेंट एलिमनी लेने का भी प्रावधान है । विधवा महिलाएं यदि दूसरी शादी नहीं करती हैं तो वे अपने ससुर से मेंटेनेस पाने का अधिकार रखती हैं । इतना ही नहीं यदि पत्नी को दी गई रकम कम लगती है तो वह पति को अधिक खर्चा देने के लिए बाध्य भी कर सकती है । पैसों की तंगी होने पर महिलाएं सरकारी वकील ले सकती हैं या अपना केस स्वंय भी लड़ सकती हैं , इतना ही नहीं केस चलने के दौरान भी पति से कुछ गुजाराभत्ता की मॉग कर सकती हैं। तलाक के बाद महिला को स्त्रीधन , गुजाराभत्ता व यदि बच्चे हों तो उनकी कस्टडी पाने का अधिकार है ।
हिन्दू विवाह अधिनियम 1995 के तहत निम्न परिस्थितियों में कोई भी पत्नी अपने पति से तलाक ले सकती हैं यदि पहली पत्नी होने के बावजूद पति द्वारा उससे दूसरी शादी की गयी हो , जिसकी जानकारी शादी के बाद मिली हो । पति के सात साल तक लापता होने पर , परिणय संबंधों में संतुष्ट न कर पाने पर , मानसिक या शारीरिक रूप से प्रताड़ित करने पर , धर्म परिर्वतन कराने पर पति को गंभीर या लाइलाज बीमारी होने पर , यदि पति ने पत्नी को त्याग दिया हो और उन्हें अलग रहते हुए एक वर्ष से अधिक का समय हो चुका हो ।

भारतीय दंड संहिता 498 के तहत किसी भी शादीशुदा महिला को दहेज के लिए प्रताड़ित करना कानूनन अपराध है । अब दोषी को सजा के लिए कोर्ट में लाने या सजा पाने की अवधि बढ़ाकर आजीवन कर दी गयी है । घरेलू हिंसा में महिलाएं खुद पर हो रहे अत्याचार के लिए सीधे न्यायालय में गुहार लगा सकती हैं इसके लिए वकील को लेकर जाना जरूरी नहीं है । मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना का मुआवजा मॉगने का भी अधिकार है । इस कानून के अंतर्गत घर का बंटवारा कर महिला को उसी घर में रहने का अधिकार मिल जाता है और उसे प्रताड़ित करने वालों को उससे बात तक करने की इजाजत नहीं दी जाती । यदि किसी महिला की इच्छा के विरूद्ध उसके पैसे शेयर्स या बैंक अकांउट का इस्तेमाल किया जा रहा है , तो इसे रोक सकती है । इतना ही नहीं महिला को उसके रिश्तेदारों के घर पर भी रहने का अधिकार है, बस जरुरत है तो जागरूक व निडर होकर अपने साथ हो रहे अत्याचारों के खिलाफ आवाज़ उठाने की | यदि जीवन में आपको एक इंसान गलत मिला तो बहुत से अच्छे लोगो के सहयोग से आपको न्याय मिलेगा, कानूनी प्रकिया में समय भले ही लगे पर न्याय जरूर मिलता है।
…..”दीपा सोनी”


