मुंबई (सं. भा.)। आज भी लाइलाज बीमारी कैंसर का उपचार कराने के लिए देश के कोने कोने से लोग मरीजों को लेकर टाटा कैंसर अस्पताल आते है। यह देश का एक मात्र ऐसा अस्पताल है जहां सिर्फ कैंसर का ही उपचार किया जाता है। इसलिए देश ही नहीं विदेश मे भी इस अस्पताल की चर्चा है। लेकिन इस अस्पताल मे उपचार का लाभ लेने आने वाले मरीजों के लिए मुंबई मे सबसे बड़ी समस्या आवास को लेकर होती है। जिसको हल करने की दिशा मे प्रयास किया गया है। मुंबई में टाटा कैंसर अस्पताल में देश के दूर-दराज इलाकों से लोग कैंसर का इलाज कराने आते है। और कई मरीजों के रिश्तेदारों को फुटपाथ पर सोना पड़ता है। ऐसे में इन कैंसर के मरीजों के रिश्तेदारों के लिए एक बहुत बड़ी राहत की खबर है। शरद पवार ने ऐसे मरीज के रिश्तेदारों के लिए १०० घरों की चाबियां टाटा कैंसर अस्पताल को रविवार को सौप दी, ताकि टाटा कैंसर अस्पताल तब तक वैंÀसर मरीजों के रिश्तेदारों के रहने की व्यवस्था कर सके जब तक संबंधित मरीज का इलाज अस्पताल में चलता रहे।
शरद पवार ने क्या कहा था?
कुछ ही दिनों पहले शरद पवार पेट में दर्द की शिकायत लेकर ब्रिच कैंडी अस्पताल में भर्ती हुए थे और उनके पेट में अल्सर और गालब्लेडर की सर्जरी हुई थी। चार दिनों पहले एनसीपी नेता जितेंद्र आव्हाड उनकी तबीयत का हाल पूछने के लिए उनके बंगले पर गए थे। तब शरद पवार ने जितेंद्र आव्हाड से इन घरों का प्रश्न उठाया था। तब आव्हाड ने इस बारे में ट्वीट भी किया था, कल मैं साहेब से अचानक मिला। उन्होंने पहला सवाल किया कैंसर पेशेंट्स के रिश्तेदारों के लिए जो घर दिए जाने थे, उनका क्या हुआ? मैने उत्तर दिया कि साहब घर तैयार है। चाबियां भी जाथ में है। सिर्फ इन्हें उन लोगों को सौपना है। तब उन्होंने (शरद पवार) कहा कि देरी किस बात की?
शरद पवार के हाथों से और एनसीपी नेता जितेंद्र आव्हाड के प्रयासी से म्हाडा के १०० घरों की चाबियां रविवार को टाटा कैंसर अस्पताल को सौपी गई। टाटा कैंसर अस्पताल के प्रमुख डॉ. बडवे को शरद पवार ने ये चाबियां सौपी। इस मौके पर गृह निर्माण मंत्री जितेंद्र आव्हाड टाटा कैंसर अस्पताल के प्रमुख डॉ. बडवे सहित डॉ. श्रीखंडे, गृह निर्माण विभाग के सचिव श्रीनिवासन, म्हाडा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अरुण डिगीकर आदि लोग उपस्थित थे।
३०० स्क्वायर फुट के १०० फ्लैट्स
ये फ्लैट्स ३०० स्क्वायर फुट के हैं। ऐसे १०० फ्लैट्स टाटा कैंसर अस्पताल को दिए गए हैं, जिनके मेंटेनेंस की अब पूरी जिम्मेदारी टाटा मेमोरियल अस्पताल प्रशासन उठाएगा। इस संबंध में महाराष्ट्र का गृह निर्माण विभाग और टाटा मेमोरियल अस्पताल के बीच जल्दी ही एक करारनामे पर हस्ताक्षर किया जाएगा।
मरीजों के रिश्तेदारों को बड़ा सहारा
सिर्फ महाराष्ट्र से ही नहीं, देश भर से टाटा कैंसर अस्पताल में इलाज करवाने के लिए अनेक कैंसर के मरीज आते हैं। उनके रिश्तेदारों को रहने का कहीं ठिकाना नहीं होता। मुंबई में रहने का खर्चा उठाना आम आदमी के बस का नहीं होता है। इसलिए ऐसे रिश्तेदारों को फुटपाथ पर रहना पड़ता है। रविवार उसी निर्णय को अमल में लाया गया।


