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महारेरा ने चलाया सोंटा, २२८ बिल्डरों को भेजा रिकवरी नोटिस

मुंबई (सं. भा.)। प्रोजेक्ट को लेकर लापरवाह बिल्डरों के खिलाफ महारेरा ने जबरदस्त एक्शन लेना शुरु कर दिया है। आम लोगों को समय पर घर नहीं देने और धोखाधड़ी करने वाले पंजीकृत २२८ बिल्डरों (प्रोजक्ट) के खिलाफ महारेरा ने रिकवरी वारंट भेजा है जिसका पालन करने की जिम्मेदारी जिले के जिलाधिकारी की होगी। महारेरा के पारित आदेश का पालन नहीं करने पर यह वारंट जारी किया गया है। जिलाधिकारी वारंट के मुताबिक बिल्डरों से प्रापर्टी जप्ती की कार्रवाई करेंगे। जिन बिल्डरों के खिलाफ वारंट जारी किया गया है उनकी सबसे अधिक संख्या मुंबई, ठाणे, पनवेल और पुणे में है।

जिलाधिकारी करेंगे जब्ती की कार्रवाई

महारेरा के अधिकारी ने बताया कि राज्य में महारेरा के गठन से लेकर अब तक २१,२९४ प्रोजेक्ट के लिए आवेदन प्राप्त हुए हैं जिनमें से २१०५४ प्रोजेक्ट पंजीकृत को मंजूर किया गया। इनमें से ४३६५ प्रोजेक्ट पूरे हो चुके हैं। महारेरा में पंजीकृत प्रोजेक्ट के लिए ७२५४ शिकायतें दर्ज कराई गई थीं जिसमें से ४६१० मामले में आदेश परित किया गया है। २१२९ शिकायतों पर अभी सुनवाई चल रही है। जबकि गैर पंजीकृत प्रोजेक्ट ५४५ दर्ज किए गए थे जिनमें २२० में आदेश पारित किया गया और २४१ मामलों पर सुनवाई चल रही है।

मुंबई, ठाणे, पनवेल के बिल्डरों की संख्या अधिक

अब तक कुल ७७९९ गैर पंजीकृत प्रोजेक्ट की शिकायतें महारेरा को मिली हैं। बिल्डरों के मनमाने रवैये पर नकेल कसने और हाउसिंग उपभोक्ताओंको राहत देने तथा घर की खरीद प्रक्रिया में परदर्शिता लाने के लिए महाराष्ट्र सरकार की तरफ से १ मई २०१७ को महारेरा कानून लालू किया गया था। महारेरा गठन के बाद प्रत्येक प्रोजेक्ट को इसके तहत पंजीकृत कराना अनिवार्य हो गया था। महारेरा के तहत हो रही कार्रवाई से फर्जी बिल्डर गायब हो गए जो आम जनता को प्रलोभन देकर ठगते थे। इसमें सख्त प्रावधान है कि यदि बिल्डर अथवा डेवलपर समय पर अपना प्रोजेक्ट पूरा नहीं करना है तो उसे जुर्माना भरना पड़ता है। कारपेट क्षेत्र से अधिक रकम भी बिल्डर उपभोक्ताओंसे नहीं वसूल सकता। महारेरा के कारण ही मुंबई में ४०,००० से अधिक पÌलैट बन कर तैयार हैं जिनको खरीददार नहीं मिल रहे हैं।

महारेरा ने हाल के  दिनों में आदेश का पालन नहीं करने वाले २२८ बिल्डरों (प्रोजेक्टों) के खिलाफ रिकवरी के लिए वारंट जारी किया है। वारंट का पालन करने की जिम्मेदारी स्थानीय जिले के जिलाधिकारी की होती है जिनके क्षेत्र में यह प्रोजेक्ट आता है।

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