मुंबई (सं. भा.) । मानसून की दस्तक से पहले ही मुंबई में एक गंभीर खतरा मंडरा रहा है। बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) ने शहर की 134 इमारतों को खतरनाक और जर्जर घोषित कर दिया है, जो कभी भी ढह सकती हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से 77 इमारतों में अब भी लोग अपनी जान जोखिम में डालकर रह रहे हैं, जबकि 57 इमारतों को खाली करा लिया गया है। बीएमसी ने इन सभी इमारतों को ‘सी1 श्रेणी’ में रखा है, जिसका सीधा मतलब है कि ये रहने के लिए पूरी तरह से असुरक्षित हैं।
बीएमसी के आंकड़ों के अनुसार, हालांकि पिछले वर्षों की तुलना में खतरनाक इमारतों की संख्या में कमी आई है। 2023 में 387 और 2024 में 188 इमारतों को खतरनाक घोषित किया गया था। इस साल अब तक 134 इमारतें चिन्हित की गई हैं। अधिकारियों का कहना है कि समय पर कार्रवाई करते हुए कई इमारतों को तोड़ा गया या खाली कराया गया, जिसके चलते यह कमी आई है। लेकिन चिंता की बात यह है कि चिन्हित की गई इन 134 इमारतों में से 56 मामले अभी भी अदालतों में लंबित हैं, जिसके कारण इन खतरनाक ढांचों को गिराने की प्रक्रिया में अनावश्यक देरी हो रही है।
सबसे अधिक खतरनाक इमारतें एच/वेस्ट (बांद्रा, खार पश्चिम) और पी/साउथ (गोरेगांव) वार्ड में पाई गई हैं, जहां दोनों ही क्षेत्रों में 15-15 इमारतें रहने लायक नहीं बची हैं। इसके बाद एन वार्ड (घाटकोपर) और के/ई (अंधेरी पूर्व) वार्ड में 11-11 इमारतें चिन्हित हुई हैं। के/वेस्ट (अंधेरी पश्चिम) वार्ड में 10 और आर/साउथ (कांदिवली पश्चिम) वार्ड में 8 जर्जर इमारतें मिली हैं। बीएमसी के अनुसार, ये सभी ‘सी1 श्रेणी’ की इमारतें 30 वर्ष या उससे अधिक पुरानी हैं। निगम ने इन इमारतों में रहने वाले निवासियों को नोटिस जारी कर अगले 15 दिनों के भीतर इन्हें खाली करने का सख्त निर्देश दिया है, ताकि किसी भी संभावित दुर्घटना को टाला जा सके। अब देखना यह है कि क्या इन निर्देशों का पालन हो पाता है और क्या अदालत में लंबित मामले इन खतरनाक इमारतों को गिराने की राह में बाधा नहीं बनते। मानसून के दस्तक देते ही इन जर्जर इमारतों में रहने वाले लोगों की जान सांसत में पड़ सकती है।


