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मुंबईकरों की लाइफ लेती मुंबई के सेकंड लाइफ लाइन

  • 5 वर्षों में 834 बेस्ट दुर्घटनाओं में 88 नागरिकों की मौत
  • चुकाए 42.40 करोड़ रुपये मुआवजा
  • 14 कर्मचारियों को किया बर्खास्त, 24 को किया निलंबित

मुंबई (सं. भा.) : लोकल ट्रेन के बाद बेस्ट बसों को मुंबई का सेकंड लाइफ लाइन कहा जाता है। सड़क पर दौड़ने के दौरान यह सेकंड लाइफ लाइन बेकाबू हो लोगों की ‘लाइफ’ ले रही है।
पिछले 5 वर्षों में, 834 बेस्ट बस दुर्घटनाएँ हुई हैं और 88 लोगों की जान चली गई है। इस बात को बेस्ट प्रशासन ने स्वीकार किया है। मृत और घायल नागरिकों को 42.40 करोड़ रुपये का आर्थिक मुआवजा दिया गया है। जबकि 14 कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया गया है और 24 कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है। यह जानकारी बेस्ट प्रशासन ने आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली को दी है।
आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने बेस्ट प्रशासन से पिछले 5 वर्षों में दुर्घटनाओं, जानमाल के नुकसान और वित्तीय मुआवजे के बारे में पूछा था। बेस्ट के वरिष्ठ परिवहन अधिकारी ईगल बेंजामिन ने अनिल गलगली को पिछले 5 वर्षों के बारे में विस्तृत जानकारी दी।
जानकारी में बताया गया कि पिछले 5 वर्षों के दौरान बेस्ट और निजी ठेकेदारों से जुड़ी 834 बस दुर्घटनाएँ घटित हुई हैं। बेस्ट द्वारा 352 दुर्घटनाएँ हुईं जिनमें 51 मौतें हुईं, जबकि बेस्ट सेवा में निजी ठेकेदारों द्वारा नियुक्त कर्मचारियों द्वारा हुए 482 दुर्घटनाओं में से 37 लोगो मौत हुई। वर्ष 2022-23 और वर्ष 2023-24 में सबसे अधिक 21 मौतें दर्ज की गईं।

पिछले 5 वर्षों में मृतकों और घायलों को 42.40 करोड़ का आर्थिक मुआवजा दिया गया और 494 मामले सामने आए। सबसे अधिक राशि वर्ष 2022-23 में दी गई। उस वर्ष 107 मामलों में उच्चतम मौद्रिक मुआवजा राशि 12.40 करोड़ थी। वर्ष 2019-20 में 9.55 करोड़, वर्ष 2020-21 में 3.44 करोड़, वर्ष 2021-22 में 9.45 करोड़, वर्ष 2023-24 में 7.54 करोड़ यह मुआवजा राशि की रकम है।
पिछले 5 वर्षों में घातक दुर्घटनाओं का कारण बने कर्मचारियों की बर्खास्तगी की संख्या 12 है और 2 कर्मचारियों को व्यक्तिगत चोट के मामलों में बर्खास्त किया गया है। व्यक्तिगत चोट के मामले में 24 कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है। अन्य कार्यवाही में चेतावनी, समझाइश, कड़ी चेतावनी, वसूली, दोहरी श्रेणी में कमी की गई है।
ये आँकड़े बेस्ट प्रशासन की सुरक्षा जिम्मेदारी को उजागर करते हैं। अनिल गलगली का कहना है कि इससे पता चलता है कि प्रशासन और कर्मचारियों को अधिक सावधानी बरतने की जरूरत है।

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