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डिग्री नहीं, संस्कार जरूरी; गुरुकुल से ही बचेगा समाज: देवकीनंदन ठाकुर महाराज

मुंबई (सं.भा.): बदलते सामाजिक मूल्यों और तेजी से गिरते संस्कारों को लेकर प्रसिद्ध कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर महाराज ने गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि आज की आधुनिक शिक्षा प्रणाली बच्चों को रोजगार तो दे रही है, लेकिन उनके चरित्र, संस्कार और आत्मिक विकास को कमजोर कर रही है। ऐसे दौर में गुरुकुल शिक्षा ही समाज और आने वाली पीढ़ी के सुरक्षित भविष्य की गारंटी बन सकती है।

नवी मुंबई के खारघर स्थित कॉरपोरेट पार्क ग्राउंड में आयोजित शिव महापुराण कथा के पंचम दिवस पर शिव भक्तों को संबोधित करते हुए देवकीनंदन ठाकुर महाराज ने कहा कि गुरुकुल परंपरा केवल शिक्षा नहीं, बल्कि जीवन जीने की सम्पूर्ण कला सिखाती है। यहां अनुशासन, सेवा-भाव, गुरु के प्रति श्रद्धा, सत्य, करुणा और आत्मसंयम जैसे मूल्यों का संस्कार बचपन से ही दिया जाता है। उन्होंने कहा कि आज के बच्चे मोबाइल, सोशल मीडिया और भोगवादी संस्कृति के प्रभाव में सही और गलत का अंतर भूलते जा रहे हैं। ऐसे में गुरुकुल उन्हें माता-पिता और गुरु का सम्मान, राष्ट्र, धर्म और समाज के प्रति कर्तव्यबोध सिखाने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं।

देवकीनंदन ठाकुर महाराज ने समाज की बदलती प्राथमिकताओं पर कटाक्ष करते हुए कहा कि आज किताबें फुटपाथ पर पड़ी हैं और जूते शोरूम में सजे हैं। गायें सड़कों पर भटक रही हैं और पालतू कुत्ते महलों में पल रहे हैं। बच्चे विदेशों में बस गए हैं और माता-पिता वृद्ध आश्रमों में जीवन बिताने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि यह सब कलयुग की विकृत सोच का परिणाम है, जिससे बाहर निकलने का एकमात्र मार्ग संस्कारित शिक्षा है। गुरुकुल परंपरा ही बच्चों को संस्कार, संयम और सच्चे जीवन मूल्यों से जोड़ सकती है।

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