मुंबई (सं. भा.) : अंतिम संस्कार के लिए मुंबई के श्मशान भूमि में लकड़ी का उपयोग होता रहा है। लकड़ी की जगह अब कृषि और पेड़ के कूड़े, बुरादे और अन्य पर्यायी वस्तुओं से बनी जैविक ईंटों (ईंट बायोमास) का इस्तेमाल किया जाएगा। मुंबई मनपा ने 2017 में इस तरह के अभिनव प्रयोग की घोषणा की थी, लेकिन कुछ कारणों से योजना आकार नहीं ले पाई थी, लेकिन मनपा अब इन जैविक ईंटों के लिए टेंडर प्रक्रिया निकालने जा रही है। शुरुआत में इन ईंटों का इस्तेमाल मुंबई के 14 श्मशान भूमि में प्रायोगिक तौर पर किया जाएगा।
गौरतलब हो कि मनपा ने 2017 में दाह संस्कार के लिए जैविक ईंटों को लकड़ी के विकल्प के रूप में प्रयोग किया था। इन जैविक ईंटों का प्रयोग तीन श्मशान भूमि में किया गया था। मनपा ने अब पर्यावरण की रक्षा के लिए 14 श्मशान भूमि में इस तरह के ईंटों का इस्तेमाल करने का फैसला किया है। वनों के संरक्षण एवं पेड़ों को बचाने की इसी कड़ी में मनपा ने श्मशान में बिजली और गैस आधारित दहन केंद्र बनाए हैं। हालांकि अभी भी कई जगहों पर पारंपरिक तरीके से शव दहन किया जा रहा है, जहां मनपा द्वारा निःशुल्क लकड़ी आपूर्ति की जाती है। अब लकड़ी के विकल्प के रूप में कृषि अवशेष और वृक्ष अपशिष्ट से ब्रिकेट्स बायोमास का उपयोग किया जाएगा, जो पर्यावरण के अनुकूल है। मनपा अधिकारी मंगला गोमरे द्वारा इसके तहत योजना प्रस्तुत किया गया। उन्होंने कहा कि जल्द ही इसके लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
पारंपरिक संस्कार में प्रत्येक शव के लिए मनपा द्वारा 300 किलो लकड़ी निःशुल्क उपलब्ध कराई जाती है। यह 300 किलो लकड़ी आमतौर पर 2 पेड़ों से प्राप्त होती है। 14 श्मशानों में हर साल लगभग 6200 शवों का अंतिम संस्कार किया जाता है। दाह संस्कार के लिए साल भर में करीब 18 लाख 60 हजार किलो लकड़ी का इस्तेमाल होता है। राज्य में एक तिहाई कृषि अवशेष का निपटान किया जाता है। इससे ‘ब्रिकेट्स बायोमारा बनाया जाता है उसका गायोग करने से पर्यावरण की पादता बनी रहती है।


