मुंबई (सं. भा.) मुंबई उत्तर प्रदेश और असम के बाद महाराष्ट्र में भी मदरसों की मैपिंग (सर्वेक्षण) का काम शुरू किया गया है। अब तक 12 जिलों से शुरुआती जानकारी सामने आई है। आने वाले तीन महीनों में मैपिंग के काम में गति आएगी। ऐसा दावा राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने किया है। कानूनगो ने कहा कि राज्य में सड़कों पर रहने वाले बच्चों की बड़ी समस्या है। ऐसे बच्चों के लिए देश में पहली बार एक पॉलिसी बनी है। अब तक महाराष्ट्र में 4 हजार बच्चों को बचाकर उनका पुनर्वास किया गया है। नगर जिले में बच्चों को फंसा कर उनका धर्मातरण कराने का रैकेट चलाया जा रहा है। हमने नगर पुलिस की कार्रवाई में कई गड़बड़ियां पाईं। पुलिस विक्टिम की पहचान करने में विफल रही। नगर में एक ट्यूशन टीचर ने लड़कियों से कहा था कि तुम धार्मिक किताब पढ़ना शुरू करो और मराठी बोलना बंद करो। आयोग ने इस मामले की जांच सीबीआई या अन्य किसी जांच एजेंसी से कराने की सिफारिश की है। उन्होंने कहा कि नगर के एसपी को इस बात की जानकारी नहीं थी कि वहां चाइल्ड वेलफेयर अधिकारी है या नहीं? राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग अहमदनगर पुलिस की कार्यप्रणाली से असंतुष्ट नजर आया।

मनोरंजन उद्योग कर रहा है गाइड लाइन का उल्लंघन
प्रियंक कानूनगो ने कहा कि मनोरंजन उद्योग में काम करने वाले बच्चों के अधिकार के संरक्षण के लिए वर्ष 2011 में गाइड लाइन बनी थी, लेकिन कई बड़े निर्माता-निर्देशको की तरफ से गाइड लाइन का उल्लंघन करने की शिकायत मिली है। वेब सीरिज ‘बॉम्बे बेगम’ के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। इसमें बच्चों को गंदे सीन और नशा करते दिखाया गया है। इस तरह निर्माता-निर्देशक महेश मांजरेकर की मराठी फिल्म ‘नाय वरन भट लो कोन नाइ कोचा’ के खिलाफ खुद सेंसर बोर्ड ने शिकायत की थी, इसमें छोटे बच्चो को गंदे सीन करते दिखाया गया है। सायन में मिशनरी चिल्ड्रन होम साल्वेशन आर्मी के संबंध में आयोग ने वहां के बच्चों को अन्य जगह पर शिफ्ट करने की सिफारिश की है। इसके पहले भी आयोग दो बार सिफारिश कर चुका है, लेकिन इसका पालन नही किया गया। इस चिल्ड्रन होम की छत जर्जर हो चुकी है। यहां 34 अनाथ बच्चे रहते हैं।


