मुंबई (सं. भा.)। महाभारत काल से लेकर आज तक जुआं खेलने की परंपरा चली आ रही है जिसमे छल कपट से खेलने वाला जीतता रहता है तो जीतने की उम्मीद में जुआं खेलने वाला हारकर कंगाल होता रहता है। आज के युग में भी मुंबई के अनेक हिस्सों में अवैध जुए के अड्डे चलाये जा रहे है जिसमे क्लब चलाने वाले सिंडिकेट बनाकर पुलिस की मिलीभगत से हर महीने लाखों की कमाई कर रहे है। साथ ही पुलिस और स्थानीय नेताओ को भी सेट करके रखते है। इसी तरह से कांदिवली पश्चिम के चारकोप गांव में कई क्लब स्थानीय पुलिस की मिलीभगत से चलाये जा रहे है। इस क्लब को चलाने का मोडस ऑपरेंडीस भी अनोखा है। ये क्लब उन लोगो को भी कमीशन देते है जो जुआड़ियों को क्लब तक लेके आते है। गौरतलब हो की पश्चिमी उपनगर के कांदिवली पश्चिम के चारकोप गांव में पहले क्लब की जगह पर अवैध शराब के अड्डे चलते थे। पुलिस की शक्ति से इन शराब माफियाओं ने शराब का अड्डा बंद कर जुए का अड्डा चालू कर दिया लोगों से शराब का नशा कम हुआ की नहीं यह तो नहीं पता लेकिन जुए की लत ऐसी पड़ गई है की बिना अड्डे पर गए जुआरियों को चैन नहीं मिलता। ऐसा ही एक मामला इन दिनो कांदिवली पश्चिम के चारकोप गांव का सुर्खियों मे है जहां चलने वाले जुआ घर पर पुलिस नकेल नहीं कस पा रही है। जब क्षेत्र के जागरुक नागरिक और समाजसेवी युवाओं को खोखला करने वाले इस जुए के अड्डे के बारे मे शिकायत करते है तो चारकोप पुलिस सीधे कहती है कि आप चल के हमको दिखाओं वहां तो कुछ होता ही नहीं है। जबकि नागेश और धर्मेश अपनी टीम के साथ वहां कई जुए घर चला रहे है। सुत्र बताते है कि इन लोगों ने पुलिस को अपनी मुट्ठी मे तो कर ही लिया है। साथ भी जुए घर मे एक पिछला दरवाजा भी लगा रखा है। ताकि सीसीटीवी से पुलिस के आगमन की जानकारी मिलते ही सब को पीछे के रास्ते से बाहर निकाल देते है। हालांकि पुलिस खुद ही अपने आने की जानकारी इनको दे देती है। गौरतलब है कि दिवाली एवं अन्य तौहारों पर कुछ परंपरा के नाम पर कुछ शौक के नाम पर लोग जुआं खेलना शुभ मानते है और इसे लक्ष्मी पाने का सबसे सरल और शॉटकट तरीका भी समझते है लेकिन ऐसे लोगों की भावनाओं को भुनाकर उन्हे जुए के अड्डे पर आमंत्रित किया जाता है। और उन्हे सब कुछ हारने पर मजबुर कर दिया जाता है। स्थानीय लोगों मे इन जुआघरों के खिलाफ नाराजगी बढ़ती जा रही है। और पुलिस पर से भी विश्वास बढ़ता जा रहा है। इसलिए अब चारकोप गांववासी उच्च अधिकारियों के साथ नेताओं को भी पत्र लिखकर इसे बंद कराने की बात करेंगे। संगठन भारत ने इस संदर्भ मे जब वरिष्ठ पुलिस निरिक्षक शिंदे से बात की तो उन्होंने बहुत भोलेपन से कहा हमारे पास ऐसी कोई जानकारी नहीं है आप चल के हमको बताओं। बताया जाता है की जुए का अड्डा चलाने वाले उन लोगो को भी कमीशन देते है साथ ही पुलिस और उनके खबरियों को भी पटा के रखते है।


