दिल्ली (सं. भा.) दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 के लिए मतदान 5 फरवरी को होगा और मतगणना 8 फरवरी को। जैसे-जैसे चुनावी तारीख करीब आ रही है, दिल्ली की राजनीति में गर्माहट बढ़ती जा रही है। राजनीतिक दलों के नेताओं के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी, भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच मुख्य मुकाबला है, लेकिन बहुजन समाज पार्टी और अन्य क्षेत्रीय दल भी अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं। चुनावी माहौल में हर तरफ जुबानी जंग छिड़ी हुई है। नेता एक-दूसरे पर तीखे हमले कर रहे हैं, व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है, और बड़े-बड़े वादे किए जा रहे हैं।
दिल्ली का यह चुनाव न सिर्फ स्थानीय मुद्दों पर आधारित है, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह लगातार बीजेपी के प्रचार अभियान को तेज कर रहे हैं, वहीं आम आदमी पार्टी के संयोजक और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी लगातार रैलियां और सभाएं कर रहे हैं। कांग्रेस, जो इस चुनाव में वापसी की कोशिश कर रही है, अपने पुराने वोट बैंक को फिर से जीतने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है। चुनाव प्रचार के दौरान, जहां एक तरफ विकास कार्यों का दावा किया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ एक-दूसरे की कमजोरियों को उजागर करने में कोई भी दल पीछे नहीं है।
आम आदमी पार्टी का चुनावी अभियान और बयानबाजी
आम आदमी पार्टी की तरफ से मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अपनी पार्टी के कार्यकाल को जनता के सामने रखते हुए कई दावे किए हैं। उन्होंने कहा कि आप सरकार ने शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं में क्रांतिकारी बदलाव लाया है। उन्होंने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि भाजपा की हरियाणा सरकार दिल्ली की जनता को पानी के संकट में धकेल रही है। केजरीवाल ने दावा किया कि भाजपा सरकार ने दिल्ली के पानी में ज़हर मिला दिया है, जिससे दिल्ली के एक तिहाई इलाकों में पानी की कमी हो गई है।
भाजपा ने इस आरोप को पूरी तरह से खारिज कर दिया है और इसे महज चुनावी प्रचार का हथकंडा करार दिया है। गृहमंत्री अमित शाह ने केजरीवाल के बयान पर पलटवार करते हुए कहा, “अगर केजरीवाल को यमुना के पानी में जहर के बारे में इतनी जानकारी है, तो वे इसका सबूत दें। झूठे आरोप लगाकर जनता को गुमराह करना उनकी आदत बन चुकी है।” भाजपा ने कहा कि अगर यह दावा गलत निकला, तो केजरीवाल को कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
आप के अन्य नेताओं ने भी भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा कि दिल्ली के लोगों को परेशान करने की साजिश रची जा रही है। आप प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज ने कहा, “हमारे कार्यकर्ताओं को भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा परेशान किया जा रहा है, महिलाओं को धमकाया जा रहा है और हमारे प्रचार को बाधित किया जा रहा है। भाजपा हार के डर से इस तरह की ओछी राजनीति पर उतर आई है।”

भारतीय जनता पार्टी का प्रचार और जवाबी हमले
भाजपा ने अपनी चुनावी रणनीति को बेहद आक्रामक बनाया है और आप सरकार पर लगातार हमले कर रही है। भाजपा नेताओं का कहना है कि आप की सरकार भ्रष्टाचार से भरी हुई है और दिल्ली को बर्बाद करने का काम किया है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा, “केजरीवाल सरकार ने दिल्ली में शराब नीति घोटाले से लेकर मोहल्ला क्लीनिक घोटाले तक, सिर्फ घोटाले किए हैं। इनका एक ही मकसद है- जनता को बेवकूफ बनाना और खुद की जेब भरना।”
गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि यह सरकार झूठे वादे करने में माहिर है। उन्होंने कहा, “पांच साल पहले केजरीवाल ने कहा था कि यमुना इतनी साफ होगी कि मैं उसमें नहाकर दिखाऊंगा। अब वही केजरीवाल कह रहे हैं कि यमुना में जहर मिला हुआ है। यह खुद उनके झूठ का सबसे बड़ा सबूत है।”
भाजपा की रणनीति दिल्ली में हिंदुत्व के एजेंडे को भी आगे बढ़ाने की है। भाजपा ने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी सरकार ने हिंदू धर्म और परंपराओं का अपमान किया है। भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने कहा, “केजरीवाल सरकार ने छठ पूजा पर प्रतिबंध लगाने की कोशिश की थी, अब यह हिंदुओं का हितैषी बनने की कोशिश कर रही है।”
कांग्रेस की कोशिशें और हमले
कांग्रेस, जो दिल्ली में दो दशकों तक शासन कर चुकी है, अब अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने की कोशिश में है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भाजपा और आप दोनों पर हमला बोलते हुए कहा कि इन दोनों पार्टियों ने दिल्ली को बर्बाद कर दिया है। उन्होंने कहा, “भाजपा और आप दोनों ही जनता के साथ धोखा कर रही हैं। भाजपा सांप्रदायिकता फैलाने में व्यस्त है, और आप सिर्फ ड्रामा करने में।”
कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में 300 यूनिट मुफ्त बिजली, महिलाओं को ₹2500 महीना, बेरोजगार युवाओं को ₹8500 महीना, और मुफ्त स्वास्थ्य बीमा का वादा किया है। कांग्रेस नेता अजय माकन ने कहा, “केजरीवाल सिर्फ प्रचार करने में माहिर हैं। उन्होंने दिल्ली के कर्मचारियों की पेंशन बंद कर दी, ठेका कर्मचारियों को स्थायी नहीं किया और सरकारी स्कूलों की हालत खराब कर दी।”
कांग्रेस ने भाजपा पर भी तीखा हमला बोलते हुए कहा कि भाजपा सिर्फ ‘ध्रुवीकरण की राजनीति’ कर रही है। कांग्रेस की नेता प्रियंका गांधी ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा, “भाजपा दिल्ली को हिंदू-मुसलमान में बांटना चाहती है, लेकिन जनता अब इनकी सच्चाई जान चुकी है।”
चुनाव आयोग और निष्पक्षता की चुनौती
चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों को संयम बरतने की चेतावनी दी है और कहा है कि किसी भी पार्टी को गलत और भ्रामक प्रचार करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। आम आदमी पार्टी द्वारा लगाए गए ‘यमुना में जहर’ के आरोपों पर आयोग ने केजरीवाल से सबूत मांगे हैं।
इसके अलावा, भाजपा ने चुनाव आयोग से शिकायत की है कि आप और कांग्रेस सोशल मीडिया पर फर्जी वीडियो फैलाकर माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं, कांग्रेस ने आरोप लगाया कि भाजपा मतदाताओं को डराने और प्रशासन पर दबाव बनाने की कोशिश कर रही है।
दिल्ली की जनता के सामने कठिन चुनावी फैसला
दिल्ली का यह चुनाव सिर्फ विकास और सुविधाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि राजनीतिक विचारधाराओं के टकराव का भी गवाह बन रहा है। आप, भाजपा और कांग्रेस के नेता एक-दूसरे पर लगातार हमला कर रहे हैं और मतदाताओं को अपने पाले में लाने की कोशिश कर रहे हैं।
अब देखना यह होगा कि 5 फरवरी को दिल्ली के मतदाता किसे समर्थन देते हैं। क्या आम आदमी पार्टी की विकास योजनाएं फिर से जनता को आकर्षित करेंगी? या भारतीय जनता पार्टी की आक्रामक रणनीति उन्हें सत्ता में लाएगी? क्या कांग्रेस वापसी कर पाएगी?
इन सभी प्रश्नों का उत्तर 8 फरवरी की मतगणना के परिणामों में निहित होगा। दिल्ली का चुनाव मात्र राजधानी का भविष्य तय करने वाला निर्णय नहीं, बल्कि यह देश की समूची राजनीतिक धारा को प्रभावित करने वाला एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। नेताओं की वाणी अब तलवार की धार पर चल रही है, तीखे आरोपों और कटु वचनों की बौछारें हो रही हैं। राजनीतिक अखाड़े में शोर अपने चरम पर है, लेकिन अंतिम निर्णय अब दिल्ली की जागरूक जनता के हाथों में है।


