भायंदर (सं. भा.) सामूहिक विवाह के माध्यम से समाज को दहेज मुक्त विवाह करने की प्रेरणा देने का काम किया जा रहा है भायंदर में गरीब बेटियों के हाथ पीले कराने की तैयारी जोरों पर चल रही है। ‘कन्यादान’ का कार्ड छप चुका है और सोमवार से बंटने भी लगेगा। 15 जुलाई को शुभ घड़ी में 11 जोड़े हमेशा के लिए एक-दूजे के हो जाएंगे। राईपुर धर्मलक्ष्मी जनसेवा ट्रस्ट की तरफ से लगातार चौथे साल सामूहिक विवाह का आयोजन किया गया है। इससे पहले 39 जोड़े परिणय सूत्र में बंध चुके हैं। ट्रस्ट के अध्यक्ष धर्मेंद्र शर्मा ने बताया कि इस बार एक साथ 11 जोड़ों की शादी कराई जाएगी। ये जोड़े गुजराती व मराठी परिवार से हैं।
वधुओं को जेवर के साथ घर गृहस्थी का सामान
शर्मा कहते हैं कि उनकी संस्था सर्वजातीय व धर्मीय शादी कराती है। उन्होंने कहा की दो साल से कोरोना का प्रभाव है फिर भी दानदाताओं ने उन्हें हिम्मत व खुलकर दान दिया, जिससे सामूहिक शादी वे अनवरत करा पा रहे हैं। सामूहिक विवाह खुले के बजाय इस बार भायंदर पश्चिम में व्यंकटेश वैंक्वेट हॉल में रखा गया है। शर्मा ने कहा कि लॉकडाउन में शादी कैसे की जाती है ? इस सामूहिक शादी से इसका एक उदाहरण वे पेश करना चाहते हैं। शादी दो चरणों में कराई जाएगी। मेहमानों को अलग-अलग समय पर बुलाया जाएगा। एक जोड़े के परिवार से सिर्फ 12 लोग शादी में शामिल होंगे। वधुओं को जेवर के साथ घर गृहस्थी – का सारा सामान देकर विदा किया जाएगा।


