मुंबई (सं.भा.) देशभर में डिजिटल इंडिया और कैशलेस लेनदेन को बढ़ावा देने के सरकारी दावों के बीच बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के अस्पतालों की तस्वीर इससे अलग नजर आ रही है। महाराष्ट्र विधानसभा में सामने आई जानकारी के अनुसार, बीएमसी के अस्पतालों में केवल केईएम अस्पताल ही ऐसा है, जहां अस्पताल प्रबंधन सूचना प्रणाली (एचएमआईएस) के तहत यूपीआई आधारित डिजिटल भुगतान की सुविधा उपलब्ध है। वहीं 16 उपनगरीय और 5 विशेष अस्पतालों में मरीजों को अब भी नकद भुगतान पर ही निर्भर रहना पड़ रहा है।
विधानसभा में विधायक अमोल पाटील और मूरजी (काका) पटेल के गैर-तारांकित प्रश्न के लिखित उत्तर में प्रशासन ने बताया कि सायन अस्पताल में अस्पताल प्रबंधन सूचना प्रणाली (एचएमआईएस) लागू करने की प्रक्रिया जारी है, लेकिन वहां भी अभी तक डिजिटल भुगतान सुविधा शुरू नहीं हो सकी है। इसके अलावा नायर, कूपर, 16 उपनगरीय अस्पतालों और द्वितीयक स्वास्थ्य सेवा विभाग के अधीन आने वाले 5 विशेष अस्पतालों में डिजिटल भुगतान व्यवस्था लागू करने के लिए अब तक कोई निविदा प्रक्रिया भी शुरू नहीं की गई है।
बीएमसी ने अपने जवाब में स्वीकार किया है कि डिजिटल भुगतान प्रणाली लागू होने से अस्पतालों के नकद भुगतान काउंटरों पर लगने वाली लंबी कतारों में कमी आएगी, मरीजों और उनके परिजनों को सुविधा मिलेगी तथा भुगतान प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और तेज होगी। इसके बावजूद अधिकांश अस्पतालों में इस दिशा में कोई ठोस प्रगति नहीं होने से मरीजों को अभी भी नकद भुगतान की परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
विधानसभा में यह मामला सामने आने के बाद अब बीएमसी की डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि महानगर जैसे शहर में सभी बीएमसी अस्पतालों में डिजिटल भुगतान व्यवस्था जल्द लागू किए जाने की आवश्यकता है, ताकि मरीजों को आधुनिक और सुविधाजनक स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।


