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मनसे के हिंदुत्व के खिलाफ शिवसेना ने खेला मराठी कार्ड

  • 31 मई तक दुकानों पर मराठी साइन बोर्ड लगाना अनिवार्य

मुंबई (सं. भा.) : महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री व शिवसेना के सर्वेसर्वा उद्धव ठाकरे और उनके चचेरे भाई व महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के अध्यक्ष राज ठाकरे में इन दिनों सियासी तल्खी काफी बढ़ गई। शिवसेनाप्रमुख स्व. बालासाहेब ठाकरे के नकशे कदम पर चलते हुए मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे इन दिनों हिंदुत्व का सियासी नगाड़ा बजा रहे हैं। साथ ही खुद को कट्टर हिंदुत्ववादी नेता साबित करने के लिए मस्जिदों पर भोंगे के माध्यम से पांच टाईम पढ़ी जाने वाली नमाज की न सिर्फ पुरजोर खिलाफत कर रहे हैं, बल्कि मस्जिदों से भोंगे उतरवाने के लिए अपने चचरे भाई व महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे पर पूरा दबाव बनाये हुए हैं। राज ठाकरे ने जब मनसे पार्टी बनाई थी तब उन्होनें स्वं को मराठी माणूस के हक्क के लिए लड़ने वाले नेता की छवि अपनाई थी। उस दौरान उनके इशारे पर मनसैनिकों ने मुंबई सहित महाराष्ट्र भर के दुकानों और प्रतिष्ठानों के बाहर मराठी भाषा में बोर्ड लगाए जाने को लेकर उग्र प्रदर्शन भी किए थे।

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि हिंदुत्व की राह पकड़ने के कारण राज ठाकरे का मराठी माणूस की   हितैषी नेता वाली छवि कहीं न कहीं कमजोर पड़ी है। इसी का फायदा शिवसेना उठना चाहती है। राज्य के सत्ता की बागडोर वर्तमान में शिवसेना के पास है। यानी राज्य में अच्छा या बुरा जो भी होगा असर मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की छवि पर पड़ना लाजमी है। इसी प्रकार जो भी राज्य सरकार द्वारा निर्णय लिया जाएगा उसके लिए मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को उत्तरदायी माना जाएगा।

गौरतलब है कि राज्य सरकार ने दुकानों सहित

सभी प्रतिष्ठानों में मराठी साइन बोर्ड लगाना अनिवार्य किया है। जिस पर मुंबई मनपा ने भी नई नियमावली बनाकर दुकानों पर लगे साइन बोर्ड मराठी में होना अनिवार्य किया है । मनपा ने मुंबई के सभी दुकानदारों को निर्देशित करते हुए कहा है कि 31 मई तक दुकानों पर लगे साइन बोर्ड मराठी में होने चाहिए। दुकानों पर लगे साइन बोर्ड में मराठी में लगा नाम फलक अन्य भाषाओं के लगे नाम फलक से बड़ा होना चाहिए। मनपा ने दुकानों की जाँच करने के लिए 24 वार्ड में तीन सदस्यों की टीम बनाई है। जिसमे एक लाइसेंस इंस्पेक्टर का समावेश किया गया है। लाइसेंस इंस्पेक्टर सहित तीन सदस्यों की टीम दुकानों का निरीक्षण करेगी और मराठी में बोर्ड न होने पर दुकानदारो पर नगद में दंड लगाएगी अथवा उन्हें कोर्ट में खींचेगी। दुकानों में बड़े अच्छर में दिखाई दे ऐसे साइन बोर्ड लगना चाहिए। राज्य सरकार ने मार्च 2022 के अधिवेशन में निर्णय लिया था कि दुकानों में लगे साइन बोर्ड मराठी में होना चहिए। जबकि वर्ष 2018 के निर्णय अनुसार जिस दुकान एवं कार्यालय में 10 से अधिक कर्मचारी कार्यरत होंगे उनमें ही मराठी साइन बोर्ड की सख्ती थी। राज्य सरकार के लिए निर्णय के अनुसार मनपा कार्रवाई करेगी। दुकानों पर महापुरुषों के नाम को भी हटाने की समय सीमा ६ जून तक दी गई थी जिसे भी अब ३१ मई तक हटाना अनिवार्य किया गया है। मनपा दुकानों, अस्थापनाओं और कार्यालयों में मराठी बोर्ड की जांच करने के लिए 3 सदस्यों की टीम गठित की गई है। इस समिति में एक इंस्पेक्टर सहित 2 अन्य अधिकारियों का समावेश है।

महाराष्ट्र दुकान और प्रतिष्ठान संशोधन अधिनियम 2022 को धारा 36 ‘सी’ (1) के तहत पंजीकृत प्रत्येक दुकान-प्रतिष्ठान पर लागू पारा 7 के अनुसार मराठी भाषा में नेमप्लेट लगाना अनिवार्य है।

इस निर्णय के अनुसार मराठी भाषा में नाम बोर्ड को प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाए। यदि बोर्ड में अन्य भाषाओं को शामिल किया जाता है, तो ये अक्षर मराठी भाषा से बड़े नहीं होने चाहिए। साथ ही शराब की दुकानों के लिए नियमों के मुताबिक अब महापुरुषों या किलों के नाम नहीं दिए जा सकते।

जांच के दौरान मराठी का साइन बोर्ड नही होने पर उसको नोटिस दी जाएगी मराठी बोर्ड लगाने से इंकार करने पर मामला दर्ज कर कोर्ट के द्वारा कार्रवाई की जाएगी।  पहली बार पाए जाने पर और आगे मराठी में बोर्ड लगाने को मान्य करने पर दंड लगाकर छोड़ा जाएगा।

मनसे के हिंदुत्व के खिलाफ शिवसेना का यह मराठी कार्ड आगामी मुंबई मनपा चुनाव के मद्देनजर खेला गया है। सियासी गलियारों में यह भी चर्चा जोरों पर है कि मनपा चुनाव में राज ठाकरे के हिंदुत्व बनाम उद्धव ठाकरे का मराठी कार्ड में से कौन सा मुद्दा लोगों को ज्यादा प्रभावित कर पाएगा यह चुनाव नतिजा आने के बाद ही पता चलेगा।

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