पर्यावरण शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है। पहला परि और दूसरा आवरण। जिसमें परि का मतलब है हमारे आसपास या यह कह लें की हमारे चारोंओर हैं। वहीं आवरण का मतलब है जो हमें चारोओर से घेरे हुये है।
पर्यावरण जलवायु, स्वछता, प्रदूषण तथा वृक्ष को मिलाकर बनता हैं।ये सभी चीजें यानी पर्यावरण हमारे दैनिक जीवन से सीधा संबंध रखती है और उसे प्रभावित करती हैं। मनुष्य और पर्यावरण एक दूसरे पर निर्भर करती है। पर्यावरण के जैविक संघटकों में सूक्ष्म जीवाणु से लेकर कीड़े मकोड़े सभी जीव जंतु और पेड़ पौधों के अलावा उनसे जुड़ी सारी जैव क्रियाएं और प्रक्रियाएं भी शामिल है। जबकि पर्यावरण के अजैविक संघटकों में निर्जीव तत्व और उनसे जुड़ी प्रक्रियाएं आती हैं। जैसे पर्वत, चट्टानें, नदी, समुद्र, हवा और जलवायु के तत्व इत्यादि। सामान्य अर्थों में यह हमारे जीवन को प्रभावित करने वाले सभी जैविक और अजैविक तत्वों, तथ्यों, प्रक्रियाओं और घटनाओं से मिलकर बनी इकाई हैं। यह हमारे चारोओर व्याप्त है और हमारे जीवन की प्रत्येक घटना इसी पर निर्भर करती हैं और संपादित होती हैं।
मनुष्यों द्वारा की जाने वाली समस्त क्रियाएं पर्यावरण को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करती हैं।
इस प्रकार किसी भी जीव और पर्यावरण का भी संबंध होता हैं। जो की एक दूसरे पर आश्रित होता है।
मानव हस्तक्षेप के आधार पर पर्यावरण को दो भागों में बांटा जा सकता है। जिसमे पहला है प्राकृतिक या नैसर्गिक पर्यावरण और दूसरा है मानव निर्मित पर्यावरण।
संयुक्त राष्ट्रसंघ द्वारा घोषित यह दिवस पर्यावरण के प्रति वैश्विक स्तर पर जागरूकता लाने के लिये मनाया जाता है।इसकी सुरुवात सन 1972 में 5 जून से 16 जून तक संयुक्त राष्ट्र संघ महासभा द्वारा आयोजित विश्व पर्यावरण सम्मेलन से हुई। 5 जून 1973 को पहला विश्व पर्यावरण दिवस मनाया गया।
पर्यावरण संरक्षण के लिए विश्व के अनेक देश समय-समय पर चिन्तन-मंथन, और सम्मेलन करते रहते हैं,ये हम सबको ध्यान रखना होगा यदि इसी प्रकार प्रकृति का दुरुपयोग करते रहे तो वो दिन दूर नहीं कि धरती के सभी प्राणी किसी न किसी बीमारी से ग्रसित रहेंगे और शुद्ध जल के एक-एक बूँद के लिए तरसते रहेंगे। पर्यावरण संरक्षण में जल, थल, वायु, पेड़ -पौधे, समुद्र नदियाँ, झरने,पहाड़ ,पशु-पक्षी, एवं जीव-जन्तु,नर-प्राणी सब आते हैं और सबकी सुरक्षा भी अति आवश्यक है,लेकिन सोचने की बात यह है जब हमारा भौगोलिक परिवेश दूषित विषैला होगा तो सारे खान-पान और पौष्टिक स्वास्थ्यवर्धक चीजों का कोई महत्व नहीं होगा। पर्यावरण संरक्षण के लिए पौधे लगाना तो जरुरी है ही कल-कारखानों के विषैले धुँआ और उनसे निकलने गंदे जहरीले पानी पर भी रोक जरुरी है,पालिथिन बैग के जितने फायदे नहीं है उससे ज्यादा पर्यावरण को नुकसान है,हर दिन न जाने कितने ही बेज़बान पालिथिन में फेंके कचरा खाते हैं और साथ में पालिथिन खाकर मर जाते हैं,पालिथिन जलाने से निकलने वाले धुएँ से वायु प्रदूषण फैलता है सांस के मरीजों की सांस लेने में बहुत परेशानी होती है।
पर्यावरण संरक्षण का सबसे बेहतर विकल्प है – जल संरक्षण नदियों को स्वच्छ रखकर शुद्ध पानी को बेवजह ना बहाएं कम से कम साल में एक पौधा सब लोग लगाएं एवं उसका संरक्षण करें,कारखानों के गन्दे पानी नदियों में ना प्रत्यारोपित करें,घरों का गंदा पानी नालियों में जाए एवं सीवर लाइनों को दुरुस्त रखे जिससे पीने के पानी और पर्यावरण की समुचित सुरक्षा हो सके॥
किरण मिश्रा


