भारत अपने दो स्वदेशी तेजस एमके1 फाइटर्स दुर्घटनाओं में गंवा चुका है। अब ऐसी मीडिया रिपोर्ट्स हैं कि भारतीय वायुसेना जल्द ही हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) तेजस एमके1 फाइटर्स के बेड़े में दो नए इसी तरह के जेट्स की भरपाई कर सकती है या फिर इसे नए और एडवांस फाइटर्स तेजस एमके1ए से बदल सकती है। सबसे बड़ी बात यह है कि तेजस एमके1 को ही ऐसी एडवांस खूबियों से लैस किया जा रहा है, जिससे युद्ध के दौरान ही दुश्मन के रडार जाम हो जाएंगे और तबाही मचाकर भारत के ये स्वदेशी फाइटर्स सुरक्षित लौट सकेंगे। यह फैसला तब आया है, जब फाइनल ऑपरेशनल क्लियरेंस के दो फाइटर्स दो साल के भीतर हादसों के शिकार हो गए। 2024 में भारत ने पहला तेजस एमके1 फाइटर, जबकि 2025 में दुबई एयर शो में गंवा दिए थे। दोनों ही एयरक्रॉफ्ट सेवा में महज तीन या चार साल ही रह पाए थे। तेजस एमके1ए तेजस एमके1 से बहुत एडवांस है। तेजस एमके1ए उन्नत एईएसए रडार से लैस है। इसमें इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सूट और स्वदेशी अस्त्र हथियार भी होते हैं। इसमें उड़ान के दौरान ही ऑनबोर्ड ऑक्सीजन जनरेशन सिस्टम और हवा में ही ईंधन भरने की क्षमता होगी। यह भारतीय वायुसेना की जरूरतों को पूरा करेगी। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, तेजस एमके1ए के वायुसेना के बेड़े में आने तक तेजस एमके1 को ही अपग्रेड किया जा रहा है। इसमें ईएम पीओडी, सॉफ्टवेयर डिफाइंड रेडियो (एसडीआर) और सैटकॉम लगाए जा रहे हैं। इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर पॉड एक सेल्फ-कंटेन्ड, एयरक्राफ्ट पर बाहर से लगा हुआ पॉड होता है जो प्लेन को बचाने और दुश्मन के रडार और हथियार सिस्टम को भ्रमित करने, धोखा देने या डिसेबल करने के लिए इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम का इस्तेमाल करता है। ये पॉड दुश्मन के खतरों का पता लगाकर और उन्हें जैम करके मुश्किल माहौल में एयरक्राफ्ट के बचने की संभावना बढ़ाने के लिए बहुत जरूरी हैं। फाइटर जेट्स में क्या होते हैं एसडीआर। इसे जानने के लिए यहां बताना जरूरी है कि एक फाइटर जेट में एसडीआर यानी सॉफ्टवेयर-डिफाइंड रेडियो एक लचीला कम्युनिकेशन सिस्टम है जो पारंपरिक, फिक्स्ड-फंक्शन हार्डवेयर की जगह रेडियो सिग्नल को प्रोसेस, मॉड्यूलेट और डीकोड करने के लिए सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करता है। यह रियल टाइम में कई फ्रीक्वेंसी और वेवफॉर्म (जैसे, वी/यूएएफ, एचएफ) पर सुरक्षित, हाई-स्पीड और इंटरऑपरेबल वॉयस/डेटा कम्युनिकेशन को संभव बनाता है। सैटकॉम यानी सैटेलाइट कम्युनिकेशंस का मतलब है, दूर की जगहों के बीच आवाज, डेटा और वीडियो ट्रांसमिशन के लिए रेडियो सिग्नल को आसान बनाने, बढ़ाने और रिले करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, पृथ्वी की परिक्रमा करने वाले सैटेलाइट का इस्तेमाल करना। यह ग्लोबल टेलीकम्युनिकेशंस के लिए एक जरूरी बैकबोन का काम करता है, जिससे दूरदराज के इलाकों, एविएशन, समुद्री और आपदा राहत की स्थितियों में कनेक्टिविटी मिलती है, जहां जमीनी इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं होता है। सेकेंड स्क्वॉड्रन में अभी तक 16 तेजस विमान हैं। भारतीय वायुसेना के सेकेंड स्क्वॉड्रन में 16 तेजस एमके1 एफओसी एयरक्रॉफ्ट हैं। ये जेट पुराने ईएलएम-2032 रडार और एवियानिक्स से लैस हैं। हालांकि, एयर डिफेंस के मामलों में ये ऑपरेशनल जरूरतों और ट्रेनिंग मिशनों को पूरा करते हैं। तेजस एमके1 तेजस एमके1ए की तरह उन्नत नहीं हैं। तेजस एमके1ए में एडवांस्ड इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर (ईडब्ल्यु) सिस्टम, पॉड बेस्ड जैमिंग कैपेबिलिटी और इंप्रूव्ड एवियानिक्स आर्किटेक्चर है। फिलहाल रिप्लेसमेंट का इरादा नहीं है। हालांकि, मीडिया रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि भारतीय वायुसेना का दुर्घटना के शिकार दो लड़ाकू विमानों को रिप्लेस करने का फिलहाल अभी ऐसा तुरंत कोई प्लान नहीं है। वायुसेना अभी भी पहले तेजस एमके1ए का इंतजार कर रही है। इसका ऑर्डर एक करार के तहत 2021 में ही दिया जा चुका है। 2032 तक आ सकता है तेजस एमके1ए। भारतीय वायुसेना ने 73 तेजस एमके1ए सिंगल सीटों और 10 दो सीटों वालें फाइटर्स खरीदे हैं। हाल ही में वायुसेना ने 97 और सिंगल सीटों वाले तेजस एमके1ए खरीदने का करार किया है। तेजस एमके1ए की पूरी खेप 2032 के आखिर तक मिलने की संभावना है।


