35 किलो घटाकर सोनम कपूर ने साबित किया जुनून
मुंबई (स भा): बॉलीवुड में ग्लैमर के पीछे संघर्ष की कई कहानियाँ छिपी होती हैं, और सोनम कपूर की कहानी उनमें से एक है। अनिल कपूर की बेटी होने के बावजूद सोनम को फिल्मी सफर आसान नहीं मिला। एक्टिंग से पहले वह एक डायरेक्टर बनने का सपना लेकर आई थीं, लेकिन ‘ब्लैक’ के सेट पर बतौर असिस्टेंट डायरेक्टर काम करते हुए उनका रुझान कैमरे के सामने आने में बढ़ा।
जब संजय लीला भंसाली ने उन्हें ‘सांवरिया’ के लिए चुना, तो शर्त थी कि उन्हें 35 किलो वजन घटाना होगा। 86 किलो से सफर शुरू कर सोनम ने सिर्फ फिटनेस ही नहीं, बल्कि खुद पर विश्वास भी हासिल किया। ‘सांवरिया’ भले बॉक्स ऑफिस पर नहीं चली, लेकिन सोनम को पहचान मिल गई।
इसके बाद उन्होंने ‘दिल्ली 6’, ‘आई हेट लव स्टोरीज’, ‘आयशा’, ‘थैंक यू’ और ‘मौसम’ जैसी फिल्मों में काम किया, लेकिन लगातार चार फिल्में फ्लॉप रहीं। इस दौर ने सोनम के करियर को संकट में डाल दिया। मगर 2013 में आई ‘रांझणा’ ने न सिर्फ उनके करियर को बचाया, बल्कि उन्हें एक मजबूत कलाकार के रूप में स्थापित किया।
‘भाग मिल्खा भाग’, ‘खूबसूरत’, ‘प्रेम रतन धन पायो’, ‘नीरजा’ और ‘पैड मैन’ जैसी फिल्मों में बेहतरीन प्रदर्शन के दम पर सोनम ने दिखा दिया कि अभिनय में विविधता और मेहनत के बल पर टाइपकास्टिंग को तोड़ा जा सकता है। ‘नीरजा’ के लिए उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला, जो उनके फिल्मी सफर का एक मील का पत्थर बना।
यह कहानी उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणा है जो पहचान से ज़्यादा परिश्रम में यकीन रखते हैं। सोनम कपूर की यात्रा दर्शाती है कि असफलताओं के बाद भी दृढ़ निश्चय और मेहनत से सफलता की मंज़िल पाई जा सकती है।


