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कवयित्री सरिता त्रिपाठी की कविताएं

सांगीपुर, प्रतापगढ़ (उत्तर प्रदेश) में रहती हैं। इन्होंने रणवीर रणंजय पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज, अमेठी ( डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय) से गणित से ग्रेजुएशन- बीएससी किया है और फिलहाल यूपीएससी की तैयारी हिंदी साहित्य से कर रही हैं। आगे चलकर विज्ञान में शोध करने का इनका इरादा है। सरिता त्रिपाठी कविताओं के साथ सामयिक विषयों पर लेख लिखने का भी शौक है। इनकी कविताएँ सुंदर मानवीय संवेदनाओं को प्रतिबिंबित करती हैं साथ ही इनमें समाज सुधार के प्रति एक तड़प भी रहती हैं। ये आईएएस अधिकारी बनकर समाजसेवा के साथ नारी सशक्तिकरण के क्षेत्र, पिछड़े वर्गों के उत्थान व शिक्षा क्षेत्र में सुधार भी काम करना चाहती हैं।

कोरोना की जंग

कोरोना तूने ये कैसा फैलाया जंजाल।

प्रगतिशील दुनिया को तूने कर रखा बेहाल।।

न हँसकर जी पाते हम न जान चैन से जाती।

तेरी ही शंका में सबकी बीत रही दिन राती।।

रोज सुबह अखबारों में तेरे ही चर्चे दिखते।

दिन-प्रतिदिन लाख करोड़ो में अब तेरे आंकड़े बढ़ते।।

कुछ पॉजिटिव हुए निगेटिव कुछ ने जान गवाई।

कुछ की तो तेरे भय से खुद ही साँसे थम आई।।

कोविड उन्नीस बन किया आगमन बीस को किया बेहाल।

जो कुछ कसर बची थी वो इक्कीस में रहे निकाल।।

क्या कोई दुश्मनी मानव ने कर रखी थी तुमसे।

क्या उसी का बदला आज ले रहे तुम कोरोना हमसे।।

कई घरों की रोटी छीनी बिखर गये परिवार।

अब तो सिर से ऊपर हो रहे तेरे अत्याचार।।

अभी जरा सा ही सम्हले थे किसी तरह हम मानव।

दो-चार कदम चलते ही तुमने रूप रख लिया दानव।।

बच्चों वयस्कों की शिक्षा का कर दिया बंटाधार।

व्यवसाय छूट गए मजदूरों क…

नये रंग

जीवन के अपने नये राग चुन लूं

            उठती उमंगों की पहचान कर लूं

नये वर्ष मे नव प्रखरता सी फैलू

              नई जिन्दगी मे नये रंग भरलू……

डगर है कठिन रास्ते भी हो निर्जन

  राह कैसी भी हो खुदको न समझू निर्बल

अग्निपथ हो या राहें हो कंटको की

       सामना कैसे करना ये अनुमान कर लूं

नई जिन्दगी मे नये रंग भर लू…….

     दुनियादारी की गहरी समझ न है मुझमे

जुड़ी हूँ अपनो से जानू बस उनके सपने

मुझे न पता जिन्दगी कैसे जीते

      खुद के अनुभव व औरों से ज्ञान कर लूं

नई जिन्दगी में नये रंग भर लूं…..

       जीवन का पथ मेरा कैसा भी होगा

साथी राह  का चाहे जैसा भी होगा

          मुस्कान संग हर कदम है बढ़ना

जीवनकला आज से मन में धर लूं

        नई जिन्दगी में नये रंग भर लूं…..

नया वर्ष है पर सफर है पुराना

मेरा लक्ष्य बस मेरी मंजिल को पाना

       बने ये सफर मेरा खुशहाल इतना

हिय मे सारे दिलों का प्यार भर लूं

          नई जिन्दगी में नये रंग भर लूं……

           नई जिन्दगी मे नये रंग भर लूं……

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