यह अत्यंत प्रसन्नता की बात है कि संगठन भारत के १५ साल पूरे हो रहे हैं। आज, जब अखबारों पर संकट के बादल छाये हुए हैं, मीडिया का स्वरूप बदल रहा है, खबरनवीस भी तकरीबन लुप्त हो रहे हैं, तब, किसी अख़बार का बढ़ना, उसका निरंतर निकलना, और आगे के लिए भी विकास के रास्ते बनाना सही सोच, सही नीति और सही प्रबंधन से ही हो सकता है। इसके लिए संगठन भारत के सम्पादक-प्रकाशक श्री राज किशोर तिवारी , उनकी टीम और उनके शुभेक्षुओं की जितनी भी तारीफ की जाये, कम है।
मेरे लिए राज किशोर जी का एक ही अर्थ है -मित्र। और, संगठन भारत की भी इसी में परिभाषा पूरी हो जाती है। वह अपने पाठकों के सुख-दुःख का साथी है, इसलिए निरंतर है, और निरंतर रहेगा। और समय के साथ एक बड़े वट वृक्ष में तब्दील होगा। इलाके में एक नदी बह रही है, और वह धीरे-धीरे क्षीण हो रही है, संगठन भारत की इस पर दृष्टि पड़ती हैं। चुनाव में कहीं कोई अनियमितता हो रही है, संगठन भारत उसके खिलाफ अभियान चलाने निकल पड़ता है। राशन की दुकानों पर कोई गड़बड़ी है, स्कूलों में छात्रों के साथ कोई दिक्कत है, जन सुविधाओं को लेकर कोई दांव-पेंच है, मनपा की व्यवस्थाओं में कहीं कोई रुकावट है, सरकारी सुविधायें लोगों तक नहीं पहुँच पा रही है, बिल्डर कहीं लोगों को परेशान कर रहे हैं, और यों ही कोई नागरिक समस्या ऐसी उठ खड़ी हुई है, जिस पर लोगों का ध्यान जाना चाहिए; संगठन भारत इन चीजों को लिखने-कहने-जांचने में कभी नहीं हिचकता। कांदिवली के सर्व समाज की एक रोशनी है वह। अपने पाठकों के जीवन से जुड़ा, घुला-मिला, मददगार और साथी। इसलिए जब अखबार क्षीण हो रहे हैं, तब संगठन भारत गर्व से सिर तान कर खड़ा है, और मीडिया और मीडिया कर्मियों के लिए एक उदाहरण बन रहा है।
अख़बार की नींव गहरी सामजिकता से पडी है। राजकिशोर जी ने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत स्कूली बच्चों की पढाई और गरीबों की चिकित्सा में मदद करने से शुरू की। उनके संसाधन बहुत सीमित थे, लेकिन इरादे बड़े थे। उन्होंने इस काम को अपने गृह जिले फतेहपुर में भी फैलाया। वे लोगों के सुख-दुःख के अन्य कामों में भी शामिल होते। ये ही काम अख़बार की नीव बने। इन्हीं कामों को करने के लिए अख़बार की शुरुआत हुई , और इन्हीं कामों को करने के लिए अख़बार निकल रहा है। अनंत शुभकामनायें राज किशोर जी , कि यह अखबार चिरंजीवी बने।
एक ताकत, बड़ी ताकत इस अख़बार में एक और है। अख़बार निकालने में जरूरत पड़ने पर राज किशोर जी का पूरा परिवार संलग्न हो जाता है। उनकी इस जय गाथा में उनकी पत्नी, बेटे और कुछ परिजनों का यह पुण्य कृत्य भी समाया हुआ है। ऐसे ही उनके कई मददगार साथी हैं। कई अनन्य संरक्षक, सुहृद और शुभेक्षु भी हैं,
उन्हें भी बहुत-बहुत शुभकामनाएं। .
पूर्वांचल और देश के अन्य प्रवास और प्रव्रजन प्रभावित इलाकों के आर्थिक, औद्योगिक व सांस्कृतिक विकास के लिए काम कर रही संस्था पूर्वांचल विकास प्रतिष्ठान के भी वे संस्थापक सदस्य और संरक्षक हैं। यह संस्था ज़फराबाद और जौनपुर के पुराने इतिहास की खोज के जरिया सनातन धर्म के वैश्विक फैलाव को एक महाकाव्य वृत्र चित्र के रूप में भी प्रस्तुत कर रही है। इस फिल्म से पूरी दुनिया का पुराना इतिहास पूरी प्रमाणिकता के साथ प्रस्तुत होगा। ऐसे कामों को आगे बढ़ाने के लिए भी राज किशोर जी को बहुत बहुत धन्यवाद।
यात्रा जारी रहे। अनंत।
साथ हैं हम सब. चलता रहे कारवां।
बढे, फले और खूब फैले; इस कामना के साथ
ओम प्रकाश
पत्रकार, सचिव पूर्वांचल विकास प्रतिष्ठान


