- सरकार वसूलेगी ₹3.58 करोड़
मुंबई, महाराष्ट्र (सं. भा.) : महाराष्ट्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘लाडकी बहिन योजना’ में एक बड़ा घोटाला सामने आया है, जहां 2,652 सरकारी महिला कर्मचारियों ने नियमों का उल्लंघन करते हुए इस योजना का गलत तरीके से लाभ उठाया है. यह मामला उस समय सामने आया है जब सरकार आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की महिलाओं को सशक्त करने के लिए प्रयासरत है. चौंकाने वाली बात यह है कि इन सरकारी कर्मचारियों ने अपनी वास्तविक आर्थिक स्थिति को छिपाकर खुद को आर्थिक रूप से कमजोर दिखाकर हर महीने मिलने वाली ₹1,500 की वित्तीय सहायता अपनी जेब में डाली. इस बड़े पैमाने की धोखाधड़ी के कारण राज्य के खजाने को कुल ₹3.58 करोड़ का भारी नुकसान हुआ है. अब सरकार ने इन ‘लाडली बहना’ बनी सरकारी कर्मचारियों से वसूली का कड़ा फैसला लिया है, जो कि एक मिसाल कायम करने वाला कदम माना जा रहा है.
‘लाडकी बहिन योजना’ का मुख्य उद्देश्य वास्तव में गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि की महिलाओं को सशक्त बनाना है. यह एक महत्वपूर्ण सामाजिक कल्याण योजना है जो उन्हें हर महीने ₹1,500 की वित्तीय सहायता प्रदान कर उनके स्वास्थ्य, पोषण और समग्र जीवन स्तर में सुधार लाने में मदद करती है. यह योजना उन महिलाओं के लिए जीवन रेखा साबित हो सकती है जो वास्तव में आर्थिक संकट का सामना कर रही हैं. हालांकि, कुछ सरकारी महिला कर्मचारियों ने अपनी सरकारी नौकरी के बावजूद और अच्छी खासी आय होने के बावजूद इस योजना का लाभ लिया, जो इसकी पात्रता शर्तों का सीधा उल्लंघन है. इस कृत्य से न केवल सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ है, बल्कि उन वास्तविक लाभार्थियों के अधिकारों का भी हनन हुआ है जिनके लिए यह योजना बनाई गई थी.
महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने इस पूरे मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि सरकारी नौकरी करने वाली महिलाओं को इस योजना का लाभ किसी भी सूरत में नहीं लेना चाहिए था, और उनसे वसूली निश्चित रूप से की जाएगी. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सरकारी कर्मचारी होने के नाते उन्हें नियमों का पालन करना चाहिए था और धोखाधड़ी में शामिल नहीं होना चाहिए था. मंत्री के बयान के बाद, कई सरकारी विभागों ने तो अवैध रूप से प्राप्त की गई राशि की वसूली की प्रक्रिया शुरू भी कर दी है, और अन्य विभागों को भी जल्द ही इस संबंध में विस्तृत निर्देश जारी किए जाएंगे ताकि पूरे राज्य में एक समान कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके.
‘लाडकी बहिन योजना’ की पात्रता और धोखाधड़ी का पर्दाफाश
‘लाडकी बहिन योजना’ केवल उन्हीं गरीब महिलाओं के लिए है जिनकी वार्षिक पारिवारिक आय ₹2.5 लाख से कम है और जिनकी उम्र 21 से 65 वर्ष के बीच है. इस योजना का लाभ विवाहित, अविवाहित, तलाकशुदा, विधवा, परित्यक्त, या निराश्रित महिलाएं ले सकती हैं, बशर्ते वे निर्धारित आय सीमा के भीतर आती हों. इस योजना की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण शर्त यह है कि लाभार्थी महिला सरकारी कर्मचारी नहीं होनी चाहिए, क्योंकि सरकारी कर्मचारियों की आय सीमा सामान्यतः पात्रता मानदंड से काफी अधिक होती है. यह शर्त स्पष्ट रूप से यह सुनिश्चित करने के लिए रखी गई थी कि योजना का लाभ केवल उन्हीं लोगों तक पहुंचे जिन्हें इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है.
जांच में यह सामने आया है कि अब तक 2,652 सरकारी महिला कर्मचारियों ने अवैध रूप से इस योजना का लाभ उठाया है. ये महिलाएं अगस्त 2024 से अप्रैल 2025 के बीच लगातार नौ महीनों तक लाभ प्राप्त करती रहीं हैं, और प्रत्येक महिला ने औसतन लगभग ₹13,500 का गलत तरीके से लाभ लिया है. यह आंकड़ा दिखाता है कि यह कोई इक्का-दुक्का मामला नहीं है, बल्कि एक संगठित तरीके से की गई धोखाधड़ी है.
कैसे सामने आया पूरा भ्रष्टाचार और आगे की कार्रवाई
इस पूरे भ्रष्टाचार का खुलासा तब हुआ जब महाराष्ट्र के सामान्य प्रशासन विभाग ने कर्मचारियों के डेटा को आईटी विभाग और आधार-आधारित सत्यापन के माध्यम से गहनता से जांचा. यह एक महत्वपूर्ण कदम था जिसने इस बड़े घोटाले को उजागर करने में मदद की. अब तक 1.2 लाख कर्मचारियों की जांच हो चुकी है, जिसमें 2,656 सरकारी महिला कर्मचारी फर्जी लाभार्थी पाई गई हैं. चौंकाने वाली बात यह है कि अभी भी लगभग 6 लाख अन्य महिला कर्मचारियों की जांच और सत्यापन बाकी है, जिससे यह आंकड़ा और भी बढ़ सकता है और घोटाला करोड़ों से भी आगे निकल सकता है.
वहीं, दूसरी तरफ, राज्य सरकार ने लगभग 7.7 लाख ऐसी महिलाओं के भुगतान भी रोक दिए हैं जो एक साथ दो सरकारी योजनाओं – ‘लाडकी बहिन’ और ‘नमो शेतकरी’ – का लाभ ले रही थीं. यह कदम यह सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है कि कोई भी व्यक्ति दोहरी योजनाओं का लाभ न ले पाए और सरकारी संसाधनों का उचित उपयोग हो सके. आने वाले समय में ऐसे मामलों की संख्या भी बढ़ने की आशंका है क्योंकि डेटा सत्यापन की प्रक्रिया जारी है. सरकार ने डिफॉल्टर कर्मचारियों से स्वेच्छा से अवैध रूप से प्राप्त की गई राशि लौटाने की अपील की है और ऐसा न करने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी है. सरकार ने इस कृत्य को सेवा आचरण का गंभीर उल्लंघन माना है, जिसके लिए संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी की जा सकती है, जिसमें निलंबन या बर्खास्तगी तक शामिल हो सकती है. यह घटना सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता पर फिर से जोर देती है.


