मुंबई (सं. भा.)। ‘अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत’ यह कहावत इन दिनों वार्ड ३२ की जनता एक दूसरे को कहती फिर रही है इस वार्ड की नगरसेविका स्टेफी मॉरिस केणी हैं जो गत मनपा चुनाव में कांग्रेस की टिकट पर नगरसेविका चुनी गई है। इसके नगरसेविका चुने जाने के बाद से वार्ड ३२ के लोगों के सामने सिवाय पछताने के अब कोई चारा नहीं बचा है। लोग हैरान-परेशान हो कर अब यह कहते फिर रहे है कि स्टेफी केणी को क्यों चुन लाया। काश उसकी जगह गीता भंडारी को जीता लाते।
बता दें कि स्टेफी केणी का मायका गोराई में है और उसकी शादी २ साल पहले खारोडी में हुई है। मायका और ससूराल का भावनात्मक फायदा उसे मनपा चुनाव में मिला और वह कांग्रेस की टिकट पर चुनाव जीत गई। जीतने के बाद से खारोडी चैपल के सामने इसने संपर्क कार्यालय खोला है पर ज्यादतर समय यहां दरवाजे पर ताला लटका दिखाई देता है। अपनी छोटी-मोटी कामों को लेकर इस वार्ड की जनता जब स्टेफी केणी के कार्यालय पहुँचती है तो ताला लटका देख उनका मुंह भी लटक जाता है। कई चक्कर लगाने के बाद भी जब जनता को अपनी नगरसेविका के दर्शन नहीं हो पाते है तो नाली, सड़क, गल्ली आदि की समस्याओंको लेकर लोग विधायक असलम शेख के पास पहुंच जाते हैं। लोगों का कहना है कि इस वार्ड में जो काम हुए हैं वह पूर्व शिवसेना नगरसेवक अजित भंडारी के कार्याकाल के समय के प्रस्तावित थे। उसी समय जो मनपा ने फंड पास किए थे वह अब कार्य के रुप में दिखाई दे रहे हैं। स्टेफी केणी ने नगरसेविका बनने के बाद अजित भंडारी के समय के पास हुए कामों का नारियल फोड़ने का कार्य यह किया है। अब तक के कार्यभार को देखते हुए वार्ड ३२ के लोगों में स्टेफी केणी को जीता कर लाने का मलाल साफ दिखाई देता है। क्षेत्र के उत्तर भारतीय और मराठी भाषी तो अपने को पूरी तरफ उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। इनका कहना है कि काश मृदु भाषी गीता भंडारी को हम वोट देते तो आज यह दिन देखने को नही मिलता।


