मुंबई (सं. भा.)। कांदिवली पश्चिम, न्यू लिंक रोड से सटे गणेश नगर के के. डी. कंपाउंड में चल रहे एस आर ए स्किम रोज नया रंग लेता जा रहा है। जो मोदी स्पेस बिल्डर कभी चीफ प्रमोटर विजय पाल के दम पर यहां पैठ बनाने में कामयाब हुआ था। अब वह भी गिरगिट की तरह अपना रंग बदलता हुआ दिखाई दे रहा है। विजय पाल ने मोदी स्पेस बिल्डर पर ‘संगठन भारत’ से फोन पर हुई बातचीत में बड़ा सनसनी खेज आरोप लगाया है। विजय पाल का कहना है कि जो बिल्डर चीफ प्रमोटर का नहीं हुआ वह आम झोपड़ा धारकों का क्या होगा।
गौरतलब है कि १८ जनवरी २०१५ को मोदी स्पेस ने एस आर ए स्कीम का काम शुरु किया था। विजय पाल को सोसायटी का चीफ प्रमोटर बनाया गया। वह अब भी है पर मोदी स्पेस की अब नियत में खोट आ गई है और एन-केन-प्रकारेण वह विजय पाल को चीफ प्रमोटर के पद से हटाने की योजना बना रहा है। ऐसा आरोप खुद विजय पाल ने लगाया है।
पाल ने बताया कि सब कुछ ठीक चल रहा था। मोदी स्पेस ने दिसंबर २०१६ में एस आर ए स्कीम के तहत सोसायटी के मेंबरों का सबमिशन भी एसआरए कार्यालय में करा दिया। हम सब यह सपना देखने लगे थे कि जल्द हीं हमे अपने बिल्डिंग में घर मिल जाएगा। पर हमारा सपना तब टूट गया जब ५ मई २०१७ को पता चला कि मोदी स्पेस ने रुपारेल इंफ़्रा और श्री सिद्धिविनायक इंफ़्रास्ट्रक्चर प्राइवेट ली. नामक दो बिल्डरों से हाथ मिला लिया यानी ज्वाइंट वेंचर कर लिया। इस बारे में जब मोदी स्पेस के आनंद मोदी के विजय पाल ने बात चीत कर सच्चाई जानने की कोशिश की तो मोदी ने कहा कि मुझ पर भरोसा रखो हमारी कंपनी १९७१ की है। हम किसी दूसरे बिल्डर से ज्वाइंट वेंचर क्यों करेंगे। इस को लेकर मोदी स्पेस बिल्डर की ओर से २४ मई २०१७ को पूरे क्षेत्र में लोगों के घर घर ज्वाइंट वेंचर की बात को कोरी अफवाह बताने वाला पैंपलेट भी बांटा गया। गुजरते समय के साथ मोदी स्पेस का झूठ अब किसी से छीपा नहीं है। अब अपने इस झूठ के उजागर होने और विजय पाल को खरीदने में असमर्थ इन तीनो बिल्डरों ने उसे अपने रास्ते से हटाने के लिए कुचक्र रचना शुरु कर दिया है। इस संबंध में मोदी स्पेस बिल्डर का पक्ष जानने के लिए जब उनके प्रोजेक्ट को संभालने वाले व्यक्ति को फोन किया गया तो उसने फोन नहीं उठाया।


