मुंबई (सं. भा.)। राइट टू एजुकेशन एक्ट (आरटीई) का पैसा नहीं मिलने से नाराज फेडरेशन ऑफ स्कूल असोसिएशन ऑफ महाराष्ट्र ने ७ अप्रैल को स्कूल बंद रखने का निर्णय लिया है।
आरटीई का पैसा नहीं देने का आरोप
फेडरेशन के अनुसार पिछले चार सालों से स्कूलों को आरटीई के तहत छात्रों को पढ़ाने के एवज में मिलने वाले पैसा का भुगतान नहीं हुआ है। फेडरेशन के सदस्य भरत मलिक के अनुसार सरकार पर स्कूलों का १२ हजार करोभ रुपए बकाया है। किंतु बार-बार पत्र लिखने के बाद भी अभी तक स्कूलों को पैसा नी मिला है। इसलिए मुंबई समेत देश के ४५ हजार निजी स्कूलों ने ७ अप्रैल को स्कूल बंद करने का निर्णय लिया है।
इसमें राज्य के ८ हजार निजी स्कूल भी शामिल हो रहे हैं। मलिक के मुताबिक आरटीई का पैसा नहीं मिलने की वजह से कई स्कूल बंद होने के कगार पर पहुंच गए हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री समेत शिक्षा विभाग को कई पत्र लिख कर स्कूलों की समस्या के बारे में अवगत करवाया गया है। लेकिन अभी तक कोईजवाब नहीं आया है।
१२ से अधिक संगठनों ने दिया आंदोलन को समर्थन
विवेक आहूजा के मुताबिक केवल महाराष्ट्र में ही ८ हजार स्कूलों में छात्रों का प्रवेश आतटीई के तहत होता है। सरकार द्वारा पैसा नहीं देने की वजह से स्कूल का खर्च चलाने के लिए स्कूलों को फीस बढ़ानी पड़ रही है।
शिक्षक और अभिभावकों के १२ से अधिक संगठनों ने फेडरेशन के आंदोलन का समर्थन करने का ऐलान किया है। देश के सभी बच्चों को शिक्षा मुहैया करवाने के लिए केंद्र सरकार ने राइट टू एजुकेशन एक्ट बनाया है।
इसके तहत सभी निजी स्कूलों की २५ फीसदी सीटें गरीब बच्चों के लिए आरक्षित की गई है। आरटीई के माध्यम से गतीब बच्चों को स्कूलों में एडमिशन करवाया जाता है। एक छात्र की शिक्षा पर हर साल स्कूल १७ हजार रुपए खर्च करते हैं।


