उन्नाव(स.भा.)। बिछिया सीएचसी क्षेत्र के टीकरगढ़ी गांव में सड़क किनारे बच्चों के आयरन सिरप के गत्ते फैले पड़े मिलने के मामले की अभी जांच पूरी भी नहीं हो पाई है कि इसी बीच सीएचसी मियागंज में अस्पताल परिसर में मार्च में एक्सपायर हो चुके ऑक्सीटोसिन के इंजेक्शन कूड़े के ढेर में पड़े मिले हैं। जबकि नियमानुसार इन इंजेक्शनों को जमीन में दफन कराना चाहिए। अस्पताल प्रशासन अपनी चूक पर पर्दा डालने में जुटा है। प्रभारी चिकित्साधिकारी ने इसकी जानकारी से इन्कार किया है। हालांकि जानकार बताते हैं कि कूड़े के ढेर में इंजेक्शन पड़े मिलने की चर्चा के बाद कर्मचारियों ने कूड़े के ढेर में आग लगा उन्हें नष्ट करने का भी प्रयास किया है।
मियागंज सीएचसी में गंदगी का साम्राज्य स्थापित है। प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत मिशन को पलीता लगाने का दृश्य अस्पताल परिसर में देखने को मिल रहा है। परिसर में जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हैं। इन्हीं कूड़े के ढेरों में सैकड़ों ऑक्सीटोसिन के इंजेक्शन पड़े हैं। दर असल यह इंजेक्शन प्रसव के समय गर्भवती को लगाने के लिए आते हैं। खुले बाजार में इनकी बिक्री प्रतिबंधित है। जो इंजेक्शन कूड़े में पड़े मिले हैं वह मार्च 2019 में एक्सपायर हो चुके हैं। माना जा रहा है कि एक्सपायर होने के बाद नियमानुसार इन्हें नष्ट न करा कूड़े में फेंक दिया गया। सीएचसी प्रभारी राजेश कुमार वर्मा ने बताया कि मैं प्रशिक्षण में सीएमओ कार्यालय आया हूं, अभी इसकी जानकारी नहीं है। वापस अस्पताल पहुंच जांच कराऊंगा। सीएमओ डॉ. लालता प्रसाद ने कहा कि सीएचसी प्रभारी से रिपोर्ट तलब की है, जिसकी लापरवाही होगी उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।


