वर्ना होगा केस दर्ज
मुंबई (सं. भा.) : कोरोना काल में संक्रमण होने के डर से जिन कैदियों को घर जाने दिया गया था। अब उन सभी को फिर से हाजिर होने के लिए फरमान जारी किया गया है। अगर यह कैदी 15 दिन के अंदर संबंधित जेल में नही पहुंचते हैं तो उन्हें भगोड़ा घोषित कर उनके खिलाफ भा.द.वि. की धारा 224 के तहत केस दर्ज किया जाएगा।
बता दें कि कोरोना वायरस और जेलों में कैदियों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था की जिन कैदियों की सजा सात साल से कम है, उन्हें फिलहाल जेल में नहीं रखकर कुछ दिनों के लिए रिहा किया जाए, इससे कोरोना महामारी फैलने से रोका जा सकता है, लेकिन शर्त थी की जिन कैदियों को रिहा किया जा रहा है, वह शहर छोड़कर कहीं नहीं जाएंगे और घर पर ही रहेंगे। उस दौरान राज्य भर से करीब 4 हजार कैदियों को राज्य भर के विभिन्न जेलों से छोड़ा गया था।
जेलों में भीड़भाड़ को रोकने के लिए जेल के कैदियों को रिहा करने का आदेश भी शामिल है। वो फैसला जो कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए लिया गया था। प्रोटोकॉल में बदलाव की सूचना उन कैदियों को दी जाएगी, जिन्हें जेलों में लौटने के लिए दो सप्ताह का समय दिया गया है। हालांकि अभी भी जेलों में कैदियों की संख्या जरूरत के हिसाब से अधिक है।
जेल प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार 1 अप्रैल, 2022 से कोविड-19 से संबंधित सभी प्रतिबंधों को रद्द कर दिया गया है।


