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गोली की गोशाला में बसी दुनिया

जौनपुर (सं. भा.)  : शादी हुई, फिर बच्चे। जिम्मेदारी बढ़ी तो निकल पड़े। घूमते-घूमते जा पहुंचे उज्जैन। जहां संत से हुई मुलाकात में इच्छा जाहिर की तो उन्होंने भविष्य बता दिया, जिसे नाभीपुर गांव निवासी जय प्रकाश मिश्रा उर्फ गोली ने अपने जीवन का लक्ष्य ही मान लिया और लौटकर घर के समीप गोशाला स्थापित कर गो वंशों की सेवा में जुट गए। यहां इनसे ऐसा नाता जुड़ा कि वे सुख को ही भूलकर घर से चंद कदम दूर पीली नदी के किनारे स्थापित गोशाला में ही दुनिया बसा ली। जय प्रकाश की शादी करीब 20 वर्ष की उम्र में हुई। दो वर्ष में वे पिता भी बन गए, जिसके बाद जिम्मेदारी बढ़ी तो वे निकल पड़े। घूम-घूमते वे उज्जैन जा पहुंचे। यहां उनकी मुलाकात एक संत से हुई, जिनके समक्ष उन्होंने अपने भविष्य को लेकर ¨चता जताते हुए रास्ता दिखाने की प्रार्थना किया। यहां संत ने उन्हें जो बताया उससे उनकी दुनिया ही बदल गई। गोली बताते हैं कि गुरू जी ने बताया था कि गोली जाओ तुम्हारे घर के समीप एक नदी है। उसी के किनारे गौशाला स्थापित करों वहीं तुम्हारा लक्ष्य रखा है। इसके बाद वह सीधे घर आए और घर के समीप पीली नदी के किनारे श्री बाबा धाम गौशाला स्थापित किया। शुरू में कुछ दिक्कत हुई, लेकिन धीरे-धीरे गोली की दुनिया ही बदल गईं। गेरुआ वस्त्र धारण किए गो सेवा का संकल्प लिए दिन-रात अब गौशाला में ही समय देने लगे, जिन्हें देखकर आजाद होकर विचरण करने वाली गाय खुद आ जाती हैं। देखने से ऐसा लगता है मानों ये गोली नहीं कलयुग में कान्हा है। किसानों को दिखाई जैविक खेती की राहगोली मिश्रा की गौशाला ने किसानों को जैविक खाद की राह भी दिखाई है। दो दशक पहले जब गोली ने गेरुआ वस्त्र धारणकर गोशाला स्थापित करने का संकल्प लिया तो लोगों को सहसा यकीन न हुआ था, लेकिन आज वह किसानों के लिये भी फायदेमंद साबित हो रहा है। गोली बताते हैं कि खेती में जुगाड़ तकनीक से जैविक खाद तैयार की जाती है। इसके लिए एक घोल बनाया जाता है। इसमें तीन तरह के बैक्टीरिया होते हैं। फिर इस घोल में गोबर, ईएम घोल, नीम या सरसों की खली जिप्सम आदि को मिलाया जाता है। करीब 45 दिन बाद यह घोल जैविक खाद के रूप में तैयार हो जाता है। यह भी है गोली की ¨चतागोली गो सेवा के साथ-साथ किसान व पर्यावरण को लेकर भी ¨चतित हैं। वे बताते हैं कि खेती-किसानी में केमिकल के इस्तेमाल से एक तरफ जहां भूमि की उर्वरता लगातार कम हो रही है। वहीं दूसरी तरफ मानव स्वास्थ्य यूरिया, डाई और खतरनाक केमिकल युक्त कीटनाशकों का इस्तेमाल करने से हानिकारक कीटों के साथ उन पशुओं, कीट-पतंगों व पक्षियों की जान भी जा रही है। ऐसे में पर्यावरण के लिए भी बड़ा खतरा उत्पन्न हो रहा है। इस खतरे से लोगों को बचाने व इसके साथ ही रोजगार प्रदान कर उन्हें स्वावलंबी बनाने के क्षेत्र में जैविक खेती को सर्वाधिक उपयोगी है। वे क्षेत्र के किसानों को जागरुक करने के लिए जैविक खेती, जैविक खाद और उसे व्यवसायिक स्तर पर अपनाने की मुहिम भी चला रहे हैं। आसपास के लोग उनसे कुछ सीखने आते हैं। शुरू में देशी तकनीक से खेती किसानी में कम लाभ होता था, लेकिन जैविक उर्वरक तैयार कर उसका उपयोग जब हुआ तो उत्पादन बेहतर हुआ और आमद भी होने लगी है। गायों के चारे को कांट्रेक्ट पर ली दस बीघा जमीन

गोली ने बताया कि गांव में बीस बीघा खेत लिए हैं। ट्रैक्टर से खेती करके पशुओं का चारा, पानी, साहित अन्य व्यवस्थाएं करते हैं। गांव के ही कपिल यादव समय समय पर चारे की व्यवस्था अपने निजी स्त्रोत से करते हैं। 16 सालों से चप्पल का किया त्याग

गो-सेवा में लगे गोली 16 वर्षा से चप्पल का त्याग कर दिया है। वे चप्पल नहीं पहनते है। गांव वालों ने उन्हें अपना प्रधान भी चुन चुके हैं। पूर्व प्रधान गोली अपनी जिम्मेदारियों का अच्छे से निर्वहन किया, जिसके लिए लोग आज भी उन्हें अपना प्रेरणा स्त्रोत मानते हैं।

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