फतेहपुर (सं. भा.) : शौचालय निर्माण का अधूरा लक्ष्य न सिर्फ पंचायती राज विभाग बल्कि जिले के अफसरों की गले की फांस बना है, फिसड्डी जिला होने के कारण यहां का काम सीएम तक की नजर में आ चुका है। नतीजा कि अफसरों ने तेजी के साथ निर्माण कराने की कवायद शुरू की है। हालत यह है कि शौचालयों का निर्माण मानक से हटकर सिर्फ खाना पूरी हो रही है। ऐसे में स्वच्छ भारत मिशन का उद्देश्य ही जिले में भटकता दिख रहा है। कहीं घटियां ईंट तो कहीं पर कच्चे गारे से शौचालयों के टैंक बनाए जा रहे हैं।
जनपद में सितंबर माह तक करीब डेढ़ लाख शौचालयों का निर्माण लक्ष्य है। लक्ष्य पूरा हुआ तो जनपद दो अक्टूबर को ओडीएफ घोषित हो जाएगा। निर्मित हो रहे शौचालय कितने दिन सुविधा देंगे इसकी कोई गारंटी नहीं है। जिन शौचालयों का निर्माण तेजी के साथ हो रहा है, उसमें मानक और सामग्री दोनो का ख्याल नहीं रखा जा रहा है। भिटौरा विकास खंड के जगतपुर आदिल मजरे बाबूगंज की बात की जाए तो यहां पर प्रधान व सचिव की देखरेख में शौचालय एक साथ बनवाए जा रहे हैं, निर्माण के लिए एक ही भट्ठे से घटिया ईंट मंगा ली गयी है, उसी से सभी शौचालय बनाए जा रहे हैं।


