जाने की न ऐसे जिद करना,
आये हो अभी मैखाने में।।
कुछ देर तकल्लुफ़ चलने दो,
आउँगी नजर पैमाने में ।।
मैं पास बैठकर आँखों में,
जीभरके निहारूँगी तुमको।
और मस्ती में डूबे डूबे ,
पाना फिर मुझे तराने में ।।
नाजुक हाथों से रम लेकर,
मैं ऐसा जाम बनाउँगी।
महफिल में झूमोगे यारा,
कर दोगे नाम जमानें में।।
हर तरफ दिखूँगी मैं हीं मैं,
हर ओर मेरा जलवा होगा।
बाँहो में अपने भरकरके,
चर्चित होगे दीवाने में ।।
मदहोशी के उस आलम में,
जब होश सुहानी आयेगी।
रंग लायेगी बीती यादें,
खो जाओगे अफसानें में।।
गीतकार*रसियाकुमार


