फतेहपुर (सं. भा.) : कुपोषण दूर करने व विकास के लिए यदि गांव गोद लिए जा रहे है तो जीवन की बूंद को सहेजने के लिए तालाबों को गोद लेकर आखिर क्यों नहीं सहेजा जा रहा है। एक- एक कर मिट रहे शहर व कस्बों के तालाबों को न बचाया गया तो जीवन के बूंद से ही जिंदगी हारने लगेगी। राजस्व के रिकार्ड में दर्ज शहर के 84 तालाबों में आधे तालाबों का तो वजूद ही मिट गया है। जो बचे है उसमें चारों तरफ से हो रहे अवैध कब्जे को भी प्रशासन नहीं रोक पा रहा है। पालिका को अपनी तालाबों की पूंजी बचाने की कोई फिक्र ही नहीं है।
पानी की हायतौबा मचने पर जल संचयन की फिक्र सभी करते है, लेकिन यह केवल भाषण व बातों तक सीमित रहने से पिछले दस साल से हालातों में परिवर्तन होने के बजाए और भी बदतर तस्वीर बनती जा रही है। साढ़े तीन लाख की आबादी वाले शहर में एक भी ऐसा तालाब नहीं है जिसमें नहाने लायक पानी भरा हो। सीवर व घरों का गंदा पानी बस्ती के तालाबों में भरा होने से भू-गर्भ का पानी भी जहरीला होता जा रहा है। प्रशासन से लेकर माननीय तक इस गंभीर समस्या के प्रति संजीदा नहीं हो रहे है। कागजी कार्रवाई से बात बनने वाली नहीं है। इसके लिए हमारे माननीयों को भी कदम आगे बढ़ाने होंगे। सीसी रोड, नाली, बारातघर व स्कूल की इमारत बनाने में ही निधि का पैसा खपाया जा रहा है। क्या माननीय शहर , कस्बे व गांव के किसी एक तालाब को गोद लेकर जलसंचयन का माडल बना सकते है। माननीयों की इस पहल से दूसरे भी सीख लेकर आने वाली सबसे गंभीर समस्या के प्रति सजग होंगे।
तालाबों का हो सीमांकन
बुजुर्गों से विरासत में मिले तालाबों को बचाने के लिए सबसे पहली पहल नगर पालिका व प्रशासन को करनी होगी। शहर के प्रबुद्ध वर्ग से ताल्लुक रखने वाले साहित्यकार डा. ओपी अवस्थी, डा. चंद्र कुमार पांडेय, समाजसेवी बीपी पांडेय , देवेंद्र श्रीवास्तव आदि का मानना है कि शहर के तालाबों का सीमांकन न किया गया तो आने वाले दस साल में बचे हुए तालाब भी मिट जाएंगे। तार व खंभे से तालाब की जमीन सुरक्षित करने की पहल सबसे पहले होनी होनी चाहिए। कहा कि शहर के ज्यादातर तालाबों में आस-पास के रहने वाले लोग ही मिट्टी डालकर कब्जा करते जा रहे है।
हरियाली के लिए लगाएं जाएं पौध
स्वच्छ फतेहपुर, ग्रीन फतेहपुर का नारा देकर सबसे पहले तालाबों के चारों ओर पौध रोपण कराया जाए। इससे तालाबी जमीन सुरक्षित होने के साथ बिगड़ते पर्यावरण को टॉनिक मिलेगी। पौधरोपण के तय किए जा रहे लक्ष्य में संस्थाओं व विभागों को एक-एक तालाब में पौधरोपण की जिम्मेदारी दे दी जाए तो हरियाली से वीरान होते जा रहे शहर को नई राह मिल जाएगी।
आप बढ़ाए कदम, जागरण आपके साथ
जीवन की बूंद सहेजने के लिए यदि आप संजीदा है तो एक कदम बढ़ाए, इस नेक कार्य में जागरण आपके साथ है। समाज व आने वाली पीढ़ी को बचाने के लिए आपका यह कदम इतिहास के पन्नों का साक्षी बन सकता है। माननीय, संस्था व संगठन में से किसी में जलसंचयन के लिए कुछ करने की ललक है तो हमे फोन नंबर 05180 – 224333 या मोबाइल नंबर 9415186438 में जानकारी दें।


