मुंबई (सं. भा.)। देश में बढ़ती महंगाई को लेकर एक तरफ काँग्रेस जगह जगह जन आंदोलन चला रही है। दूसरी तरफ भाजपा २०११ तक के झोपड़ाधारकों को मकान देने का शिगुफा छोड़ रही है। भाजपा का यह शिगुफा इस कहावत पर सटीक बैठता है कि ‘बच्चे का पता नहीं, पालना लगे झुलाने’। भाजपा के इस वादे को कांग्रेस वोट पाने का महज शिगुफा बता रही है और झोपड़ाधारकों को गुमराह होने से बचने का सलाह दे रही है।
बता दें कि मुंबई भर के विभिन्न झोपड़पट्टियों में इन दिनों भाजपा नेताओंद्वारा जनसभा लेकर यह लालीपाप दिया जा रहा है कि राज्य सरकार २०११ तक के झोपड़ाधारकों को मकान देने जा रही है। इस मुद्दो को लेकर पार्टी द्वारा पूरे मुंबई भर में बैनर-पोर्स्ट लगाए गए है। झोपड़ा धारक भाजपा के इस वादे से खुश तो दिखाई देते है पर साथ ही यह संदेह भी व्यक्त कर रहे है कि उन्हें सरकार मकान देगी कैसे? राज्य सरकार ने इसको लेकर अभी तक न तो कैबिनेट में प्रस्ताव पारित किया है न हीं विभिन्न प्रकल्पों के ग्रास बन चुके १९९५ के झोपड़ा धारकों को अभी तक पुनर्वसन किया है। ऐसे में भाजपा के इस वादे पर अभी भी झोपड़ा धारकों में भ्रम फैला है। एक बात जो भाजपा लोगों को नहीं बता रही है वह यह कि घर पाने के लिए झोपड़ा धारकों को पैसे देने होंगे। यानि झोपड़ाधारकों को दोहरी मार झेलनी होगी। पहला यह कि झोपड़ा खरीदने में जो पैसे लगे वह डूब जाएगा और नया घर लेने के लिए जीवन भर की गाढ़ी कमाई का पैसा बिल्डर या सरकार को देना होगा।
इस मामले में मालाड पश्चिम विधान सभा क्षेत्र के कांग्रेस विधायक असलम शेख का कहना है कि गणेश नगर में नाले के चौड़ीकरण के समय बड़े पैमाने पर लोगों के घर छीन लिए गए। अधिकांश घर १९९५ के बने हैं। उन्हें अभी तक न तो मुआवजा दिया गया न ही उनका पुनर्वसन किया गया। ऐसे में झोपड़ा धारकों को घर देने की बात सिर्फ अगामी लोकसभा चुनाव में वोट पाने का स्टंट मात्र है। ऐसा विधायक असलम शेख का कहना है।


