मुंबई (सं. भा.) : भोजपुरी एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में छाई अश्लीलता को रोकने के लिए मालाड में पूर्वांचल विकास प्रतिष्ठान की सभा हुई जिसमें बेहूदगी रोकने के लिए महाराष्ट्र राज्य जैसे कड़ा कानून बनाने की मांग हुई |
`आप अपनी आने वाली पीढ़ी को क्या सुनाना चाहेंगे? `चोली टाईट हो गईल’ या `लॉलीपॉप लागे लू’? क्या यही है भोजपुरी–` मोरे लहंगा आवे रे भूकंप?’ या कि `हमरे लहंगा में मीटर लगा दो राजा जी? ‘ या फिर `तोहार लहंगा उठा देब रिमोट से’? `कसम से देह रसगुल्ले बा’ या `हाई पॉवर के चुम्बक बाटे इनका दुप्पटा के पीछे ‘ जैसे गीतों , ने औरतों को सिर्फ वस्तु बना दिया है। और उसे वस्तु बनाना रोज दर रोज तेज हो रहा है।”
सभा में जैसे ही यह सवाल उठा, सभा सन्न रह गयी। लेकिन जल्द ही बातचीत इस संकल्प में बदली कि इस स्थिति का विरोध किया जाएगा। उत्तर प्रदेश और बिहार सहित झारखंड के मुख्यमंत्री से भी मांग किया जाएगा कि भोजपुरी एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में छाई अश्लीलता को रोकने के लिए महाराष्ट्र डांस बार एक्ट की तरह का एक कड़ा कानून लाया जाये।
नवजीवन हाई स्कूल, मालाड, मुंबई में शनिवार, २८ जुलाई को यह सभा पूर्वांचल में आर्थिक-औद्योगिक विकास और उसके लिए जरूरी सांस्कृतिक बदलाव लाने के काम में लगी संस्था पूर्वांचल विकास प्रतिष्ठान ने बुलाई थी। संस्था मुख्यमंत्रियों को दिए जानेवाले कड़ा कानून लाने के प्रतिवेदन पर पूर्वांचल में जनसभाएं आयोजित करके १० लाख से अधिक दस्तखत कराने के काम में जुटी है। अगले तीन महीनों में २० से अधिक जनसभाएं आयोजित की जा रही हैं। सेंसर बोर्ड से भी मांग की जा रही है कि भोजपुरी फिल्मों के सेंसर के नियम कड़े किये जाएँ और “ए” सर्टिफिकेट की फ़िल्में न पास की जाएँ।
विषय की प्रस्तावना करते हुए पूर्वांचल विकास प्रतिष्ठान के सचिव पत्रकार ओम प्रकाश ने कहा कि “दुनिया की सबसे मीठी बोली इन दिनों अश्लीलता का पर्याय बन गयी है। मर गए वे रोपनी-बोवनी – कटनी के गीत. खो गए कजरी और फाग. लुप्त हो गयी विद्यापति और भिखारी ठाकुर की परंपरा.. रामलीला और रासलीला भी ऑर्केस्ट्रा के नीचे दब रहे हैं। भाषा-साहित्य, रहन-सहन, परंपरा, नैतिकता, मर्यादा सभी पर बुरा असर पड़ रहा है। प्रदर्शनकारी कलाओं की हमारी बहुत विशाल धरोहर भी ख़त्म हो रही है। संस्कृति पर भी आक्रमण है। औरतों की गरिमा, मान-मर्यादा, सुरक्षा सब पर खतरा है। भूलने की बात है कि डेढ़ – दो साल की बच्चियों तक से बलात्कार की खबरें सामने आती हैं? बच्चे, युवा, किशोर यौन अपराधों में लिप्त पाए जाते हैं? अश्लीलता ने लैंगिक समता, समानता, संवेदीकरण आदि की सारी संवैधानिक संकल्पनाओं को खा लिया है। पूर्वांचल के कुछ क्षेत्र पहले से अश्लीलता प्रभावित रहे हैं। इस आंधी ने उसे तूफ़ान में बदल दिया है। आईपीसी और पुलिस एक्ट में अश्लीलता रोकने के कुछ फौरी प्रावधान हैं, लेकिन प्रशासन उन पर समुचित अमल नहीं कर रहा है। ”
जनसभा को सम्बोधित करते हुए महाराष्ट्र के पूर्व गृह राज्यमंत्री श्री कृपाशंकर सिंह ने कहा–“ चुप रहने का वक्त नहीं है। अश्लीलता मानवीय मूल्यों और मानवीय संवेदना के खिलाफ है. इसे रोकने के लिए सरकार और समाज दोनों को आगे आना होगा। ” पद्मश्री शोमा घोष ने कहा-“ यौन कुंठा की अभिव्यक्ति हो रही है। महिलाओं पर नए सिरे से हमला किया झा रहा है। और, बच्चों का भी भविष्य ख़राब किया जा रहा है। सभा के अध्यक्ष पूर्व मंत्री श्री चंद्रकांत त्रिपाठी ने कहा–“फूहड़ता की पराकाष्ठा हो गयी है। संस्कार ख़त्म हो रहे हैं। आँखों की शर्म ख़त्म हो रही है। प्रतिकार किया जाना चाहिए। रोक लगवाई जानी चाहिए। ” एनसीपी माइनॉरिटी सेल के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री सैयद जलालुद्दीन ने कहा “ अश्लीलता-फूहड़ता से पूरा समाज बदनाम हो रहा है। इसका समस्त जान जीवन पर असर पड़ रहा है। पीढ़ियां बर्बाद हो रही हैं। ”
इंडिया टीवी की सिनेमा एडिटर रहीं सरिता सिंह ने कहा-“ भोजपुरी फिल्मों में जो कुछ हो रहा है, वह हर औरत को जलील करता है। जो लोग यू टूब या सोशल मीडिया पर ये विडीओज़ देखते हैं उन्हें लगता है कि शायद पूरब के लोग ऐसे ही होते हैं.” भाजपा नेता सुमिता सुमन सिंह ने कहा–“स्त्री- पुरुष संबंधों की जो धारणा बचपन में बन जाती है, वही स्थाई हो जाती है। स्त्री के बारे में कौन सी धारणाएं बनवा रहे हैं हम सब? ”
उत्तर क्षेत्रीय महिला मंच की उपाध्यक्ष सुनीता सिंह ने कहा–“ महिलाओं का मानसिक शोषण हो रहा है. गंदे गानों के चलते न वे परिवार के साथ चल सकती हैं, और न परिवार के लोग उनके साथ चल सकते हैं। ” अधिवक्ता राकेश सिंह ने मांग की कि डांस बार अश्लीलतारोधी कानून जैसा कानून लाया जाए। भाजपा नेता आर यू सिंह ने कहा–
“ दिक्कत समाज के मौन रहने से आयी है। बोलेंगे तो सब बदलेगा। ” मुंबई कांग्रेस के उपाध्यक्ष श्री जय प्रकाश सिंह ने कहा–“ समाज इस बारे में अरसे से चिंतित था। यह बेहतर हुआ है कि हम सब इसकी पहल कर रहे हैं। ”अभिनेता कुणाल ने कहा–“वक्त है कि चेतें हम।” सबसे मार्मिक आवाज रही विधायक प्रकाश सुर्वे की। उन्होंने कहा कि गंगा क्षेत्र की संस्कृति से तो देश का मन-प्राण बनता है।
सभा में डॉ. दौलत सिंह पालीवाल, श्री किलाचंद यादव, नगरसेवक श्रीमती मीरा यादव, पूर्व नगरसेवक गीता यादव, नगरसेवक श्री विनोद मिश्र, श्री श्रीकांत मिश्रा, श्री जयकांत शुक्ल, श्री उदय प्रताप सिंह, उद्योगपति श्री कृष्णकांत पांडे सहित समाज के अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। कार्यक्रम को सफल बनाने में जयशंकर तिवारी, राजेश सिंह, रामआसरे सिंह, घनश्याम सिंह, ठाकुर सर्वेश सिंह, हरिशंकर यादव, प्रशांत त्रिपाठी, दीपक यादव, अमीन इद्रीसी, राजकिशोर तिवारी, त्रिभुवन तिवारी और अंकित मिश्रा ने अपना योगदान दिया|
सोमवार को संस्था के प्रतिवेदन महाराष्ट्र की महिला व बाल विकास मंत्री श्रीमती विद्या ठाकुर तीनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों और केन्द्रीय गृहमंत्री समेत सूचना प्रसारण राज्यमंत्री और सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष को अग्रसारित करेंगी। प्रतिवेदनों पर १०,००० लोगों के शुरुआती दस्तखत हैं। पूर्वांचल विकास प्रतिष्ठान की अगली जनसभा २६ अगस्त को बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में आयोजित की जा रही है।


