देशी कट्टा लोडेड कारतूस घरवाली लागैले।
एके छप्पन हमरी सबसे छोटकी साली लागैले।
दुलहिन हमार देले भरि आँख कजरा,
साली के सिर पे सोहै रातरानी गजरा।
बीबी बीस रूपइया हमरी जइसे जाली लागैले,
साली सौ की गड्डी बैंक से निकाली लागैले।।
दुलहिन हमार पहिरै साडी सीधी पल्ला,
साली पहिरै जिन्स पैंट हीलैं जोगी मुल्ला।
बीबी सीधी सादी ठेठउ भोली भाली लागैले,
साली मोर हिरोइन दिल्ली क दिलवाली लागैले।
दुलहिन हमार बाटी छप्पन क बुढिया,
साली जी लागैनी बचपन क गुडिया।
बीबी रहैं त घरवा रात अमावस वाली लागैले,
साली रहै त रसिया बरहो मास दिवाली लागैले।
गीतकार: रसियाकुमार


