जौनपुर (सं. भा.) : पूर्ववर्ती सरकार द्वारा श्रमिकों, ठेला-खोंमचा वालों व रिक्शा चालकों के लिए कई महत्वाकांक्षी योजनाएं संचालित किया था। रिक्शा चालकों को मुफ्त में ई- रिक्शा देने की योजना शुरू किया था। जिले में करीब दर्जनों चालकों को समारोह आयोजित कर वितरण किया गया। इस इमदाद से अधिकांश के परिवार का जीविको पार्जन सुगमता से होने लगा। वहीं दूसरी तरफ श्रम विभाग में पंजीकृत श्रमिकों को साइकिल दिया गया था। सरकार परिवर्तन के साथ ही योजनाओं पर ग्रहण लग गया है।
सपा सरकार में अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री काल में नगर निकायों में पंजीकृत रिक्शा चालकों को ई-रिक्शा देने की योजना थी। नगरीय विकास अभिकरण के तहत जिले में सर्वे कराया गया था इसमें 71 पात्र पाए गए थे। इसमें उन्हीं लोगों को लाभ दिया गया जिनका खुद का रिक्शा हो और स्वयं चलाते हो। उनका बकायदा नगर निकाय में पंजीकरण होना चाहिए। विभाग की तरफ से अंतिम समय में 57 चालकों को ई-रिक्शा वितरित किया गया। बचे हुए कुछ लोगों को रिक्शा देने की तैयारी थी, तब तक अधिसूचना जारी कर दी गई। वही पांच सालों में श्रम विभाग से करीब 17 हजार श्रमिकों को साइकिल दी गई। इसका लाभ उन्हीं को दिया गया जिन्होंने भवन एवं सन्ननिर्माण में काम करते हुए श्रम विभाग में पंजीयन करा रखा था। ऐसे में इन विभागों से लाभ पाने के लिए अन्य पात्र भी आस लगाकर बैठे हुए है। बावजूद अभी तक नई सरकार की तरफ से कोई आदेश-निर्देश नहीं दिया जा रहा है।
इस बाबत सहायक श्रम आयुक्त वीएन दुबे व परियोजना अधिकारी डूडा एमपी सिंह ने कहा कि अभी इन योजनाओं के लिए सरकार से कोई आदेश नहीं प्राप्त हैं कि आगे की कार्यवाही शुरू की जाए। न ही बंद करने जैसा कोई पत्र मिला हैं।


