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गज़ल

तुम मुझे बदनाम ना कर मैंतो खुद बदनाम हूँ,

तेरे कारण इस जहाँ में अब सनम नाकाम हूँ।।

 

वक्त ने ढाया सितम तुम भी मुझे ठुकरा दिये

पाके भी सोहरत कहूँ क्या टूटता सा जाम हूँ।।

 

हो गया मायूस अब इस जिंदगी में क्या करूँ,

बेंच दी अपनी वसीयत,मैं किसी के नाम हूँ।।

 

प्यार का सपना दिखाकर कर दिये बर्बाद तुम,

अब मुझे लगता है ऐसा डूबता इक शाम हूँ।।

 

मौत भी आई नहीं वह ढूँढ़करके थक गई ।

इस कदर खोया यहाँ कि आज भी गुमनाम हूँ।।

 

गीतकार:  रसियाकुमार

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