कालिंजर (सं. भा.) : अजेय कालिंजर दुर्ग का ऐतिहासिक कार्तिक मेला 2 नवंबर से शुरू होगा। पांच दिनों तक चलने वाले इस मेले में बुंदेलखंड सहित प्रदेश के अन्य हिस्सों व समीपवर्ती मध्यप्रदेश से बड़ी संख्या में लोग भगवान नीलकंठ से दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
मध्यप्रदेश की सीमा पर स्थित कालिंजर दुर्ग में भगवान नीलकंठ विराजमान हैं। यहां की प्राकृतिक सुंदरता देखते ही बनती है। वैसे तो पूरे साल लोग भगवान शिव के दर्शन व एतिहासिक स्थल के अवलोकन के लिए पहुंचते हैं। लेकिन कार्तिक मेले का खास महत्व है। जिसमें पूर्णिमा के दिन तो बुंदेलखंड सहित यूपी व मध्यप्रदेश के कई हिस्सों से बड़ी संख्या में लोग कालिंजर पहुंचते हैं। सुबह से ही भगवान नीलकंठ के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का तांता लग जाता है। हजारों की संख्या में श्रद्धालु एक दिन पहले ही डेरा जमा लेते हैं ताकि भोर होते ही भगवान के दर्शन कर पूजन कर सकें। इस साल मेले की शुरुआत 2 नवंबर से होगी। तैयारियां भी शुरू हो गई हैं। प्रशासन द्वारा मेला आयोजन से पहले ही तैयारियों का दावा किया जाता है लेकिन जब भीड़ उमड़ती है तो लोगों को कहीं न कहीं समस्याओं से दो-चार होना पड़ता है। सबसे ज्यादा किल्लत पेयजल को लेकर होती है। कालिंजर दुर्ग बड़े क्षेत्रफल में फैला है जहां भगवान शिव के मंदिर के अलावा कई एतिहासिक स्थल हैं। साथ ही किले के ऊपर कई छोटे व बड़े तालाब भी हैं। मेले की तैयारियां शुरू हैं। स्थानीय लोगों को काफी पहले से मेले का इंतजार रहता है। कस्बे के व्यापारियों के अलावा दूर-दूर से भी व्यापारी यहां दुकान लगाने आते हैं।


