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डेढ दशक का सफल सफर

वर्तमान में जब लोग डिजिटल होते जा रहे हैं तो किसी भी अखबार के लिए समाज में जगह बनाना आसान नहीं रह गया। दैनिक अख़बार से लेकर साप्ताहिक अख़बार तक इस चुनौती का सामना कर रहे हैं। संकुचित संसाधन के चलते इस सफर में साप्ताहिक अख़बारों के लिए अपने वजूद को बनाए तथा बचाए रखने के लिए हर सप्ताह संघर्ष करना पड़ता है। लेकिन साप्ताहिक अखबार संगठन भारत ने 15 साल के अपने सफ़र में सभी बाधाओं को पार करते हुए यह साबित कर दिया है कि लगन और जुनून से मुकाम हासिल किया जा सकता है। भले ही इसके लिए कहीं कहीं कुछ समझौते करने पड़े हों।
वर्तमान संकट के दौर में छोटे अखबारों के लिए डेढ़ दशक का सफर तय करना बहुत ही कठिन और चुनौतीपूर्ण हो गए है। सीमित संसाधनों के बावजूद पाठकों की जरूरत को समझना, उन्हें निष्पक्ष समाचार से अवगत कराना तथा राजनीतिक दलों के कामों का जनता तक पहुंचाना हर अखबार की प्रमुख जिम्मेदारी होती हे। इसमें इसमें ईमानदारी से कोशिश करनी होती है कि किस के साथ कोई भी भेदभाव ना हो। यह चुनौती संगठन भारत ने परी ईमानदारी से स्वीकार करते हुए निभाई है। अपनी खबरों में सभी दलों के नेताओं की खबरों को जगह देना सामाजिक समस्याओं को उठाते रहना, मिशन की तरह आज तक जारी रखा है। इसमें पाठकों के साथ विज्ञापन दाताओं, लेखकों और शुभचिंतकों का बहुत बड़ा योगदान माना जा सकता है। इसके ही बल पर अखबार ने 15 साल का सफर सफलतापूर्वक तय कया है। मैं संगठन भारत अखबार, इसके मालिक संपादक के साथ पूरी टीम को बधाई देता हूं और उम्मीद करता हूं कि यह सफर इसी तरह आगे भी जारी रहेगा।
भानु प्रकाश मिश्रा
वरिष्ठ पत्रकार

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