- अवैधता को इनाम नहीं दे सकते’,
- कांदिवली चॉल की याचिका खारिज
मुंबई (स भा): बॉम्बे हाईकोर्ट ने गैरकानूनी कब्जों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। हाल ही में, कोर्ट ने कांदिवली (पश्चिम) के लक्ष्मण भंडारी चॉल में अवैध रूप से बने ढांचों की तोड़फोड़ के खिलाफ दायर एक याचिका को खारिज करते हुए सख्त टिप्पणी की है। कोर्ट ने साफ कहा कि “गैरकानूनी कब्जों को राहत देना, अवैधता को इनाम देने जैसा होगा।” यह याचिका संदीप लवंडे और तीन अन्य व्यक्तियों द्वारा दायर की गई थी। याचिकाकर्ताओं का दावा था कि 9 अप्रैल 2021 को उनके घर गिरा दिए गए थे और वे महाराष्ट्र झोपड़पट्टी अधिनियम 1971 के तहत संरक्षित निवासी होने के नाते पुनर्वास के हकदार हैं।
हालांकि, कोर्ट को बताया गया कि ये निर्माण संरक्षित वन भूमि और 50 मीटर के मैंग्रोव बफर जोन में थे, जो कि पर्यावरणीय रूप से बेहद संवेदनशील क्षेत्र हैं। राज्य के वकील ने दलील दी कि याचिकाकर्ता पहले भी अवैध निर्माण कर चुके हैं और उनके खिलाफ प्राथमिकी (FIR) भी दर्ज है। याचिकाकर्ताओं ने पुनर्वास के लिए सरकार के 2015 और 2018 के शासन निर्णयों का हवाला दिया था, लेकिन कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ये आदेश आरक्षित वन क्षेत्र और मैंग्रोव जोन पर लागू नहीं होते हैं।
पीठ ने अपने फैसले में कहा कि याचिकाकर्ता न तो कोई कानूनी अधिकार और न ही कोई मौलिक अधिकार सिद्ध कर पाए हैं। कोर्ट ने इसे ‘कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग’ माना और जोर देकर कहा कि न्यायालय ऐसा उदाहरण नहीं बना सकता, जिससे अवैध निर्माण को प्रोत्साहन मिले। कोर्ट ने यद्यपि कोई जुर्माना नहीं लगाया, लेकिन ईमानदार व पारदर्शी न्यायिक प्रक्रिया की आवश्यकता पर बल दिया


