चित्रकूट (सं.भा.): मंदाकिनी नदी की स्वच्छता और कायाकल्प को लेकर जिला प्रशासन ने अभियान की रूपरेखा तैयार करना शुरू कर दिया है। जिला पर्यावरण समिति, जिला गंगा समिति और जिला वृक्षारोपण समिति की संयुक्त बैठक डीएम पुलकित गर्ग की अध्यक्षता में कलक्ट्रेट सभागार में हुई। बैठक में नदी के तटवर्ती क्षेत्रों, मंदिरों और आश्रमों में स्वच्छता बनाए रखने के लिए विस्तृत कार्य योजना पर विचार विमर्श किया गया।
डीएम ने बैठक में निर्देश दिए कि नदी किनारे और आश्रमों में सिंगल यूज प्लास्टिक एवं थर्मोकोल के उत्पादों का पूर्ण प्रतिबंध लागू किया जाए। इसके लिए चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं और मंदिर प्रबंधन की अनुमति के बाद ही भंडारा आयोजित किए जाएं। उन्होंने कहा कि बिना अनुमति भंडारा आयोजित करने से नदी किनारे गंदगी फैलती है और इसे रोकना जरूरी है।

वन विभाग ने नदी में गिरने वाले नालों की रोकथाम के लिए एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) की स्थापना का प्रस्ताव शासन को भेजा है। डीएम ने वाल्मीकि आश्रम क्षेत्र में स्वच्छता व्यवस्था पर असंतोष व्यक्त किया और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक सुधार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
गंगा समिति के सदस्य आशीष रघुवंशी ने बैठक में मंदाकिनी में निर्मित डैम के कारण सिल्ट जमा होने की समस्या को उजागर किया। डीएम ने कहा कि जिन विभागों की जिओ टैगिंग शेष है, उसे जल्द पूरा किया जाए। बैठक में प्रभागीय वनाधिकारी नरेन्द्र सिंह, उप प्रभागीय वनाधिकारी राजीव रंजन सिंह, मुख्य विकास अधिकारी और अन्य जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे। इस अभियान के तहत जिला प्रशासन ने नदी के किनारे सफाई, कचरा प्रबंधन और पर्यावरणीय संरक्षण पर विशेष ध्यान देने की योजना बनाई है, ताकि मंदाकिनी नदी का पुनरोद्धार और कायाकल्प प्रभावी ढंग से हो सके।


