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पानी के लिए तरसता शहर, सूर्या परियोजना की धीमी रफ्तार पर सवाल

ठाणे (सं.भा)मीरा-भाईंदर में पानी की किल्लत अब गंभीर जनसमस्या बन चुकी है। शहर के लाखों नागरिक वर्षों से नियमित जलापूर्ति का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन बहुप्रतीक्षित सूर्या जलापूर्ति परियोजना अब भी पूरी नहीं हो सकी है। राजनीतिक दल प्रशासन के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं, जबकि आम जनता बढ़ती परेशानी और अधूरी जानकारी के बीच खुद को ठगा महसूस कर रही है। वर्ष 2017 में शुरू हुई इस महत्वाकांक्षी योजना के पूरे होने का इंतजार करते-करते लोगों का धैर्य जवाब देने लगा है। हालांकि प्रशासन अगस्त 2026 तक पहले चरण में पानी आपूर्ति शुरू करने का दावा कर रहा है, लेकिन नागरिकों के मन में अब भी कई सवाल बने हुए हैं।

 

एमएमआरडीए और मीरा-भाईंदर महानगरपालिका की इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत वैतरणा बेसिन स्थित सूर्या डैम से शहर को प्रतिदिन 218 एमएलडी पानी उपलब्ध कराया जाना है। केंद्र सरकार की अमृत 2.0 योजना के अंतर्गत बन रही इस परियोजना की लागत 516.78 करोड़ रुपये से बढ़कर 559.26 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है। परियोजना के लिए केंद्र और राज्य सरकार से आर्थिक सहायता मिलने के साथ मनपा भी बड़ी राशि खर्च कर रही है तथा इसके लिए हडको से कर्ज भी लिया गया है। चेना गांव तक जलापूर्ति नेटवर्क तैयार करने के लिए लगभग 200 किलोमीटर पाइपलाइन बिछाई जानी है, जिसमें से करीब 150 किलोमीटर का कार्य पूरा हो चुका है। शहर के विभिन्न हिस्सों में 23 विशाल जलटंकियों का निर्माण किया जा रहा है, जिनमें से 12 का काम अंतिम चरण में है।

 

हाल ही में हुई समीक्षा बैठक में मनपा आयुक्त राधाबिनोद शर्मा ने अधिकारियों और ठेकेदारों को निर्देश दिए हैं कि अगस्त 2026 के अंत तक पहले चरण में 60 से 70 एमएलडी पानी शहर को उपलब्ध कराया जाए। वर्तमान में मीरा-भाईंदर को स्टेम प्राधिकरण और एमआईडीसी से कुल 211 एमएलडी पानी मंजूर है, लेकिन वास्तविक आपूर्ति अक्सर इससे काफी कम रहती है। बारवी डैम के रखरखाव या शटडाउन के दौरान जलापूर्ति पूरी तरह प्रभावित हो जाती है। अधिकारियों का दावा है कि परियोजना के पूर्ण होने के बाद 48 घंटे के अंतराल पर मिलने वाला पानी बंद होकर नियमित जलापूर्ति शुरू होगी, कम दबाव की समस्या समाप्त होगी और ऊंची इमारतों तक भी पर्याप्त पानी पहुंच सकेगा। हालांकि वन विभाग, सीआरजेड, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और बिजली आपूर्ति संबंधी अड़चनों के कारण वर्षों से लटकी इस परियोजना को लेकर शहरवासियों का धैर्य अब जवाब देने लगा है और उनकी निगाहें अगस्त महीने पर टिकी हैं, जब पहली बार सूर्या परियोजना का पानी मीरा-भाईंदर पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है।

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