(पब-क्लब की महफिल – 0२ राजकिशोर तिवारी )
मुंबई (सं.भा.)। शेयर मार्केट में दाम चढ़ता-उतरता है… यह तो करीबन सभी को पता होगा लेकिन ‘शराब एँ जाम’ का दाम शायद ही चढ़ते-उतरते आपने सुना होगा। मायानगरी मुंबई के पश्चिमी उपनगर मलाड में स्थित एक शराब-शबाब का अड्डा इन दिनों बतौर ‘पब-क्लब’ सुर्खियों में है।
गौरतलब मुंबई सहित विभिन्न उपनगरों में फैलता ‘पब’ फैशन पश्चिमी उपनगर के अंधेरी से मलाड अंतर्गत कई रिहायशी इलाकों में बेखौफ चल रहा है, जिसमें स्थानीय पुलिस की भूमिका वर्तमान के लिये संदिग्ध है लेकिन इसकी जड़े मनपा से भी होकर गुजरती है। मनपा अधिकारियों की फर्ज गद्दारी से इन ‘पब-क्लब’ के हाल-कीचन सहित केबिन वगैरह बनाने में विभिन्न नियमावली की धज्जिया उड़ा दी जाती है, जिससे कस्टमर की जिंदगी खतरे में होती है। ऐसा हम नहीं कह रहे हैं बल्कि ऐसी कई घटनायें जगजाहिर हो चुकी है। मनपा अधिकारियों की फर्ज गद्दारी के पीछे छिपी होती है मोटी रकम, जिसके कारण ‘धृतराष्ट्र’ बनना लाजमी है। खैर..मलाड में इन दिनों लिंक रोड स्थित ‘एजेंट जेक’ की चर्चा जोरो पर है, जोकि ‘क्रोमा ईलेक्ट्रॉनिक’ दुकान के ऊपर स्थित है। यहां ‘शराब’ की ‘मस्ती’ पर मनोरंजन की आड़ जुआ भी खेला जाता है…एक पड़ताल में जो तथ्य सामने आये है, वही सबसे बड़े चर्चा का विषय है कि यहां शेयर मार्केट की तरह हर घंटे में ‘शराब एँ जाम’ का दाम चढ़ता और उतरता रहता है। यह भी कोई नई बात नहीं है क्योंकि लेडिजबारों के व्यापार पर कब्जा जमाने का यही मदमस्त तरीका है। दिन दहाड़े सजने वाली इस महफिल पर पुलिसिया नजर तो है लेकिन उक्त ‘नजर’ को स्वार्थी ‘पब-क्लब’ संचालकों द्वारा रिश्वतनामा नोट से शायद ‘नजर’ लगा दी जाती है। नाबालिकों, किशोर लड़कों, लड़कियो का अंदर जमावड़ा लगा रहता है, जहां सिगरेट के धुओं में छलकता जाम और यौवन का इश्क़ सभ्य समाज की संस्कृति को करारा घात कर रहा है।
*’क्रोमा इलेक्ट्रॉनिक’ में कस्टमर शर्मसार..*
इस ‘पब-क्लब’ तक पहुंचने के लिये ‘क्रोमा इलेक्ट्रॉनिक’ के अंदर से ही जाना पड़ता है, जहां ‘क्रोमा’ में खरीदारी करने गये पारिवारिक कस्टमरों को यह नजारा देखकर बच्चों के सामने शर्मसार होना पड़ता है। जगजाहिर है कि इसके पीछे भी कई व्यापारिक राज छिपे हैं क्योंकि ‘क्रोमा इलेक्ट्रॉनिक’ के स्थानीय प्रबंधन ने यूं ही नहीं समझौता किया होगा।
*उठते सवाल*- स्थानीय स्तर पर विभिन्न शिकायतों के बाद भी पुलिस-प्रशासन का मौन रहना भी कई सवाल खड़े करता है, जिसका जवाब आज नहीं तो कल शासन-प्रशासन के आला अधिकारियों को देना ही पड़ेगा…
*मनपा नियमावली की धज्जिया उड़वाने में आखिर किस अभियंता की भूमिका.?*
*’पब-क्लब’ के नाम पर चल रहे ऐसे अड्डों का विभिन्न लाईसेंस चेक करने की जिम्मेदारी किसकी..?*
*फायरब्रिगेड की नियमावली के मुताबिक अपातकालिन मार्ग है.?*
*बाल मजदूर अधिनियम की उड़ रही है धज्जियां..?*
*ऐसे कई लाईसेंस की जांच-पड़ताल के बाद ही स्थानीय पुलिस ने दी है अनुमति या मौन के पीछे छिपा है फर्ज गद्दारी का रहस्य..?*


